रुद्रपुर। युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए सरकार गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक नशा मुक्ति केंद्र खोलने जा रही है। देहरादून में 18.36 करोड़ रुपये की लागत से केंद्र का निर्माण होगा। हल्द्वानी में खाली पड़े सरकारी भवन की तलाश की जा रही है।
प्रदेश में युवा वर्ग चरस, स्मैक, गांजा, शराब कोकीन के दलदल में फंस रहे हैं। नशे से निजात दिलाने के लिए अभिभावक बच्चों को स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से संचालित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा देते हैं। प्रदेश में हल्द्वानी, पिथौरागढ़, हरिद्वार, खटीमा आदि में गैर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र बने हैं लेकिन कुमाऊं में सरकारी स्तर पर नशा मुक्ति केंद्र नहीं है। इसके कारण गरीब परिवार अपने बच्चों में पनपी नशे की प्रवृत्ति को छुड़ाने के लिए निजी केंद्रों का खर्च वहन नहीं कर पाते हैं। इसको लेकर लंबे समय से सरकारी नशा मुक्ति केंद्र को स्थापित करने की मांग उठ रही थी। राज्य गठन के 22 साल बाद सरकार ने नशा मुक्ति केंद्र बनाने की सुध ली है। समाज कल्याण विभाग की ओर से देहरादून और हल्द्वानी में नशा मुक्ति केंद्र बनाया जा रहा है। इसमें 50 पुरुष व 25 महिलाओं के रहने की क्षमता होगी। विभाग के अधिकारियों की ओर से हल्द्वानी में खाली पड़े भवन की तलाश की जा रही है।
वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को नशा मुक्ति करने का दावा
रुद्रपुर। सीएम पुष्कर सिंह धामी का वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को ड्रग्स फ्री बनाने का दावा है। इसी की तर्ज पर प्रदेश में पहली बार सरकारी नशा मुक्ति केंद्र खोले जा रहे हैं। जहां युवाओं की मनोवैज्ञानिक तौर पर काउंसलिंग की जाएगी। वहीं युवाओं के इलाज के लिए डॉक्टर व नर्स भी मौजूद रहेंगे।संवाद
देहरादून में 18.36 करोड़ रुपये की लागत से नशा मुक्ति केंद्र के निर्माण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। वहीं हल्द्वानी में केंद्र खोलने के लिए खाली पड़े सरकारी भवन की तलाश की जा रही है। प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
-आशीष भटगाईं, निदेशक, समाज कल्याण विभाग।