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Udham Singh Nagar News: घरों में बढ़ रहा नशे का दखल, जिगर पर पत्थर रख संपत्ति से करना पड़ रहा बेदखल

Wed, 05 Nov 2025 01:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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रुद्रपुर। उधमसिंहनगर में युवाओं के नसों में नशा इस कदर घुल गया है कि वे अपने माता-पिता के लिए नासूर बन गए हैं। नशेड़ी बेटों से छुड़कारा पाने के लिए परिजन उनको संपत्ति से बेदखल कर रहे हैं। यह समस्या परिवार दर परिवार बढ़ती जा रही है।
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दरअसल, जिले में बड़े पैमाने पर नशा खपाया जा रहा है। इसकी लत में पड़कर युवा न सिर्फ स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि परिवार को बर्बाद कर रहे हैं। नशेड़ी युवाओं से तंग आकर परिजन उनसे किनारा करने में भलाई समझ रहे हैं। ट्रांजिट कैंप निवासी सुषमा हलदार ने बताया कि शादी के कुछ महीने बाद उनके पति की हादसे में मौत हो गई। उन्होंने बेटे को जन्म दिया और मेहनत- मजदूरी कर उसे पढ़ाया था। उनका स्मैक का आदि हो गया था। वह घर से रुपये नहीं मिलने पर मारपीट करने लगा था। बेटे ने लोगों के घरों में चोरी करनी शुरू कर दी थी। दो बार पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज चुकी है। बेटे की हरकतों से तंग आकर उसने बेटे को संपत्ति से बेदखल कर दिया है। सुषमा का अकेला केस नहीं है बल्कि रुद्रपुर में हर दिन माता-पिता अपने बच्चों को नशे के कारण अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर रहे हैं।

केस-1
शास्त्रीनगर ट्रांजिट कैंप निवासी नन्हे ने इसी महीने अपने बेटो ओम को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया। उनका कहना था कि बेटा शादी के बाद नशा करने लगा है। इससे वह तंग आ चुके हैं।
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केस-2
शिवनगर निवासी प्रेमवती प्रसाद ने अपने बेटे सोनू को अक्तूबर में अपनी चल अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया है। प्रेमवती का कहना है कि बेटा इंजेक्शन का नशा करने का आदि है। वह घर में रहकर उससे मारपीट करता है।
केस-3
रंपुरा निवासी रोशन कोली ने अपने इकलौते बेटे रोहन को अपनी संपत्ति से बेदखल किया है। रोशन का कहना है कि बेटा नशा करता है। पहले घर में चोरी करता था, अब बाहर भी चोरियां करने लगा है। पुलिस उनके घर आती है। मजबूर होकर बेटे को बेदखल करना पड़ा।
केस-4
जगतपुरा में रहने वाले केशव मौर्या ने अपने बेटे का घर से निकाल दिया है। केशव का कहना है कि बेटा सुबह घर से निकल जाता है और आपराधिक घटनाएं कर रहा है। रात को जब भी वह घर आता है तो नशे में रहता है।
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बेदखल करना समस्या का समाधान नहीं: मनोवैज्ञानिक
सुशीला तिवारी अस्पताल के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डाॅ. युवराज पंत का कहना है कि बच्चों को बेदखल करना समस्या का समाधान नहीं है। उनका कहना है कि जिस तरह व्यक्ति को एक ही बीमारी कई बार हो जाती है उसी तरह एक बार नशे का इलाज करने पर बच्चा दोबारा नशा कर सकता है। परिजनों को उसका इलाज कराना चाहिए न कि उसे संपत्ति से बेदखल करना चाहिए। उसे नशे से बचाने के लिए परिवार की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

ऊधम सिंह नगर में पहुंच रहा सबसे अधिक नशा
पुलिस रिकार्ड के अनुसार ऊधम सिंह नगर में सबसे अधिक नशा पहुंच रहा है। वर्ष 2025 में अब तक पुलिस ने पांच किलो से अधिक स्मैक पकड़ी है। कुमाऊं के अन्य पांच जिलों में दो किलो स्मैक बरामद हुई। जिले में 28 किलो से अधिक चरस, 716 किलो गांजा, 6539 नशे की गोली, कैप्शूल व 580 इंजेक्शन पकड़े गए हैं।
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कोट:
नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। इसी कार्रवाई का ही परिणाम है कि जिले में सबसे अधिक नशा पकड़ा गया है। यूपी से आने वाले नशे को कुमाऊं में पहुंचने से पहले पकड़ा जा रहा है। मणिकांत मिश्रा, एसएसपी।
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