काशीपुर। महाभारत कालीन पवित्र तीर्थ द्रोण सागर रखरखाव के अभाव में महज एक घास का मैदान बन कर रह गया है। सागर की देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासन के पास है लेकिन प्रशासन ने भी इस सागर की देखभाल के लिए अपनी आंखें बंद कर रखी है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में इसका महत्व बताया है।
काशीपुर के पूर्वी छोर पर करीब तीन किलोमीटर की परिधि में पवित्र द्रोण सागर फैला है। इसका संबंध महाभारत काल से है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने काशीपुर की यात्रा के दौरान अपनी किताब में लिखा है कि काशीपुर में गोविषाण टीले के पास एक पवित्र सरोवर है जिसे द्रोण सागर कहा जाता है।
देश भर से हिंदू समाज के लोग इस सरोवर मेें स्नान करने आते हैं। लोगों की मान्यता है कि इस सरोवर में स्नान किए बिना तीर्थ यात्रा का पुण्य नहीं मिलता है। यात्रा वर्णन में यह भी लिखा गया है कि सरोवर के चारों ओर गुरुकुल है। सुबह-शाम गुरुकुलों के शंख, घंटियों और पक्षियों के चहचहाने से मनमोहक आवाज आती है। पुरातत्व विभाग के उत्खनन अधिकारी धर्मवीर शर्मा के अनुसार धार्मिक ग्रंथ केदार खंड और मानस खंड में भी द्रोणा सागर को पवित्र तीर्थ बताया गया है। बौद्ध धर्म के अनुसार महात्मा बुद्ध ने भी द्रोण सागर के किनारे लोगों को शांति का संदेश दिया था। महर्षि दयानंद सरस्वती ने भी द्रोण सागर किनारे तपस्या कर आर्यधर्म का प्रचार-प्रसार किया था। इस स्थान पर करीब 30 फुट ऊंचा आर्य कीर्ति स्तंभ भी बना है। और एक आर्य मंदिर भी है। प्राचीन कथाओं केे अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने गुरु द्रोणाचार्य के स्नान के लिए इस सागर को बनाया था। फिलहाल इस सरोवर में पानी की जगह सिर्फ घास ही नजर आती है।
चैती मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया कि तीर्थ द्रोण सागर पवित्र माना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार लोग बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए हरिद्वार होकर जाते थे। और यहां से लौटते समय द्रोण सागर में स्नान करते थे। 15- 20 साल पहले तक तक नगर के लोग द्रोण सागर में ही स्नान करते थे। यहां पर महिला और पुरुषों के स्नान के लिए अलग-अलग पक्के घाट बने हैं।
नगर निवासी सुरेश शर्मा ने बताया कि द्रोण सागर हमारी सांस्कृतिक धरोहर है लेकिन व्यवस्था ठीक न होने से यह सूखने लगा है। जब कि इसके रखरखाव में आने वाले खर्चे के लिए आय के पूरे संसाधन है। यहां ढाई एकड़ का बाग है और आठ दस दुकानें भी हैं। जिनसे आय की जा सकती है। उनका कहना है कि इसकी व्यवस्ता पर्यटन विभाग को देनी चाहिए। इससे सरोवर के रखरखाव के साथ ही पर्यटन का विकास भी होगा।
द्रोण सागर में काफी घास जमी हुई है। अभी घास काटने पर बरसात में घास फिर बढ़ जाएगी। सरोवर की मुख्य समस्या इसमें पानी भरने और निकासी की है। सिंचाई विभाग को सरोवर में पानी भरने और निकासी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। नगर निगम भी समय- समय पर सफाई करता है।
आकांक्षा वर्मा, एसडीएम/ नगर आयुक्त, काशीपुर।