केंद्र सरकार की योजना के तहत जिलेभर के लोगों को सस्ती दवा मुहैया कराने के लिए खोला गया जनऔषधि केंद्र को आज भी मरीजों का इंतजार है। अप्रैल 2016 में रुद्रपुर में प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना के तहत जिले में जनऔषधि केंद्र खोला गया था। जिसके बाद यह उम्मीद की जा रही थी की मरीजों को महंगी दवाओं से निजात मिलेगी और कम दामों पर सरकारी दवा मिलेगी, लेकिन डॉक्टरों की मनमर्जी के कारण प्रधानमंत्री की जनऔषधि सस्ती दवा योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
डॉक्टरों की मेहरबानी के कारण एक साल बीतने के बाद भी काशीपुर रोड गाबा चौक स्थित जनऔषधि केंद्र पर दिनभर में औसतन 50 मरीज भी सस्ती दवा लेने नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जनऔषधि केंद्र से दवा लेने के लिए नहीं कहा जाता जबकि निजी मेडिकल स्टोर से दवा लेने का दबाव डाला जाता है। जागरूकता न होने के कारण मरीज एवं तीमारदार शहर में सस्ती दवा केंद्र होने के बावजूद मेेडिकल स्टोर के बाहर लाइन लगाए खड़े नजर आते हैं। निर्धारित मेडिकल स्टोर पर कमीशन फीस तय होने के कारण डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर जेनेरिक दवाओं का नाम नहीं लिखते। कमीशन फीस का नशा डॉक्टरों पर इतना हावी है कि डॉक्टर मरीज को बाकायदा मेडिकल स्टोर का नाम और पता बताकर दवा खरीदने की हिदायत देते हैं, जो एमसीआई के नियमों के खिलाफ है लेकिन उसके बावजूद डॉक्टरों की मनमानी जारी है।
क्या कहते हैं नियम।
रुद्रपुर। एमसीआई एवं सरकार के नियमों के अनुसार डॉक्टरों को मरीज के पर्चे पर सिर्फ जेनेरिक दवाओं के नाम लिखने होते हैं। और जेनेरिक मेडिकल स्टोर से ही दवा लेने के लिए प्रेरित करना होता है। इसके साथ ही नियमों के अनुसार डॉक्टरों को जेनेरिक दवा का नाम बड़े अक्षरों में लिखना होता है ताकि जेनेरिक दवा स्टोर पर तैनात व्यक्ति उस दवा को आसानी से पढ़कर उसे मरीज को दे सके।
जमीन आसमान मूल्य का फर्क है मेडिकल स्टोर एवं जनऔषधि की दवाओं में।
दवा किस रोग के लिए बाजार मूल्य जनऔषधि मूल्य
इमाटिनिब टैबलेट कैंसर के लिये 1760 रुपये 497 रुपये
ट्राइग्रीमी सेव- 2 मधुमेह 104 रुपये 15 रुपये
फीफोल जेड महिलाओं को कैल्शियम की कमी 118 रुपये 09 रुपये
सैवलोन एंटीसैप्टिक लोशन 30 रुपये 12 रुपये
पैंटालोक डीएसआर गैस एवं एसिडिटी 88 रुपये 19 रुपये
कफ सीरफ खांसी, जुकाम 82 रुपये 13 रुपये।