जिले की 39 उद्योगों को अति प्रदूषणकारी उद्योग (जीपीआई) की श्रेणी में रखा गया है। इसमें जहां दो उद्योगों को इस श्रेणी से बाहर किया गया है तो काशीपुर के कैमिकल और सितारगंज के उद्योग को जोड़ा गया है। इन उद्योगों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से फोकस रखेगा। साथ ही तिमाही निरीक्षण भी करेगा।
नौ फरवरी को देहरादून में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक हुई। बैठक में अति प्रदूषणकारी उद्योगों के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पीसीबी उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के क्षेत्रीय अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि ऊधमसिंह नगर जिले में एक हजार 91 उद्योग हैं। इनमें से 47 उद्योगों को पहले अति प्रदूषणकारी उद्योग (जीपीआई) की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन इसके बाद जिले में आठ फैक्ट्रियों को मानक पूरे नहीं करने और प्रदूषण फैलाने की स्थिति में बंद कर दिया गया है। वर्तमान में दो नए उद्योगों को जोड़कर 39 उद्योग जीपीआई श्रेणी में रखे गए हैं।
बैठक से लौटे पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि जीपीआई श्रेणी में पेपर उद्योग, शुगर इंडस्ट्री, पेस्टीसाइड्स इंडस्ट्री, ऑटो सेक्टर, टेक्सटाइल सेंटर, डिस्टिलरी आदि उद्योग आते हैं। सिंह ने बताया कि इस साल ऊधमसिंह नगर दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ खटीमा व राजश्री मिल्क प्रोडक्टर किच्छा रोड रुद्रपुर को जीपीआई श्रेणी से बाहर किया गया। जबकि काशीपुर की एक कैमिकल फैक्ट्री और सितारगंज की एक अन्य फैक्ट्री को जीपीआई श्रेणी की लिस्ट में रखा गया है। सिंह ने बताया कि किसी भी उद्योग का प्रदूषित पानी का उत्प्रवाह प्रतिदिन 100 केजी से अधिक नहीं होना चाहिए।
जिन उद्योगों का पानी इससे अधिक उत्प्रवाह होता है उन्हें जीपीआई श्रेणी में रखा जाता है। इन उद्योगों की जांच चार महीने में एक बार दोनों बोर्ड की विशेष टीम करती है। सिंह ने बताया कि जीपीआई में शामिल उद्योगों को ऑन लाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाना जरूरी है। इसके अलावा जिन उद्योगों का पानी नहीं निकल रहा है उन्हें कैमरे लगाना जरूरी है सभी उद्योगों को सर्वर से जोड़ा गया है। इस सर्वर का बोर्ड के मुख्यालय दिल्ली स्थापित किया गया है। जहां से सीधे इन पर निगरानी रखी जाती है।