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इलाज और परहेज से दूर हो सकते हैं आनुवंशिक विकार

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कार्यशाला के दौरान अतिथि वक्ता और शोधार्थी। - फोटो : RUDRAPUR
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शरीर में बीमारियों का होना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ बीमारियां आनुवांशिक होती हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। कुछ सावधानी बरतकर उनसे न सिर्फ खुद बचा जा सकता है, बल्कि उन्हें अगली पीढ़ी में जाने से रोका भी जा सकता है। यह बात भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत सक्सेना ने कही।
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डॉ. सक्सेना जैव प्रौद्योगिकी परिषद हल्दी में ‘एडवांसेज इन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी’ विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला के चौथे दिन मंगलवार को डॉ. सक्सेना ने कहा कि जीन के जरिये आने वाली बीमारियों को जेनेटिक (हेरिडिटरी रोग) कहा जाता है। गर्भकाल में ही इनकी जानकारी होने से इसका उचित इलाज और प्रबंधन किया जा सकता है।
एसबीआर हेल्थकेयर रुद्रपुर की निदेशक डॉ. उपासना अरोरा ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति, संरचना और त्वरित जांच के विषय में बताते हुए इससे बचाव के उपायों की जानकारी साझा की। एवेंटर टैक्नोलॉजी लखनऊ की प्रोडक्शन मैनेजर डॉ. शिल्पी विश्वास ने प्रयोगशाला में प्रशिक्षण दिया, जिसमें अभय ने सहयोग प्रदान किया।
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इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक डॉ. कंचन कार्की ने अतिथियों को परिषद् की गतिविधियों से अवगत कराया तथा सह संयोजक सचिन शर्मा ने अतिथियों व मीडिया को धन्यवाद ज्ञापित किया। वहां पर अमित पुरोहित, ओपी वार्ष्णेय, अनुज कुमार जॉन, लक्षिका भंडारी, पवन मल्लाह, सौरभ पंडा आदि थे। संवाद
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