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एनएचएआई का टू-लेन खटीमा बाईपास निर्माण दो वर्षों से लंबित

Sun, 19 Feb 2017 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, खटीमा।
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खटीमा में जमीन का मुआवजा नहीं मिला - फोटो : अमर उजाला
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खटीमा। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद ही नेशनल हाइवे के पहेनियां-कुटरी चकरपुर बाइपास के लिए अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा मिल सकेगा। करीब दो वर्ष से लंबित इस बाईपास निर्माण का कार्य फिलहाल अधर में है। इस दौरान नगर के बीच वाले एनएच की जीर्ण-शीर्ण हालत से मार्ग चलने वालों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।      
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पहेनियां के लोहियापुल से प्रस्तावित एनएच के बाईपास निर्माण का कार्य रुका है क्योंकि अधिग्रहीत भूमि स्वामियों एवं मौके पर काबिज किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। अधिग्रहीत की गई भूमि राजस्व अभिलेखों में जिन किसानों के नाम दर्ज है, वह जमीन को वर्षों पूर्व बेच चुके हैं। एनएच मुआवजे की राशि राजस्व अभिलेखों के अनुसार देना चाहती है।

शासन, प्रशासन के मुआवजे देने संबंधी प्रयास दो वर्षों से कारगर नहीं हो सके हैं। लोहिया पुल पहेनिया से कुटरी चकरपुर तक करीब आठ किमी बाईपास निर्माण में करीब एक सौ उप किसानों की जमीन आ रही है जिनके नाम यह भूमि नहीं है। वह वर्षों से खेती कर रहे हैं।
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एनएच द्वारा बाइपास निर्माण के नाम पर लोहिया नदी में नौ कॉलम खड़े किए हैं। कुछ खेतों में मिट्टी भरान किया गया है। अधिगृहीत जमीन का मुआवजा न मिलने से किसानों में खासा आक्रोश है। मुआवजे के अलावा बाईपास की जद वाले किसान खेती बारी से होने वाली पैदावार से भी वंचित हैं।      
 
खटीमा। एनएच के लाइजनिंग ऑफिसर धर्मवीर पहेनिया-चकरपुर बाईपास निर्माण के लंबित मामले को मुआवजे का विवाद मानते हैं। उनके अनुसार मुआवजा राजस्व अभिलेखों के आधार पर किसानों को दिया जाता है लेकिन मुआवजे की जद वाली जमीन मौके पर अन्य किसानों के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि बाईपास बनना जरूरी है और अब नई सरकार ही तय करेगी कि मुआवजे की समस्या का समाधान क्या होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल लोहियापुल पर पुल निर्माण कार्य प्रगति पर है।
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