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भगवान विष्णु की भक्तों ने निर्जल होकर की आराधना

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रुद्रपुर में छबील लगाकर लोगों को शर्बत बांटते समाजसेवी। - फोटो : RUDRAPUR
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शहर में भक्तों ने निर्जल होकर निर्जला एकादशी का व्रत रखा। भक्तों ने पूर्वजों के कल्याण के लिए सुबह मंदिरों में दान भी चढ़ाया। इसके साथ ही सामाजिक संस्थाओं की ओर से जगह-जगह लोगों के लिए शरबत की छबील भी लगाई गई।
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सोमवार को शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, दुर्गा मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, प्राचीन अटरिया मंदिर, नीलकंठ मंदिर आदि में जाकर लोगों ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पंडित वैकुंठनाथ शास्त्री ने बताया कि निर्जला एकादशी को भीम सेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पूर्व काल में कुंतीपुत्र भीम ने इस व्रत को किया था। उन्हीं के नाम से इस एकादशी को भीम सेनी निर्जला एकादशी कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी पर व्रत रखने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन बिना जल के उपवास रखने से साल की सारी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। बताया कि मंदिर में कथा के उपरांत नगर के सभी लोगों ने अपने पूर्वजों के कल्याण के लिए फल, कलश आदि मंदिर में दान किए। इसके साथ ही लोगों को प्रसाद भी बांटा गया। वहां श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान नंदलाल भुड्डी, महामंत्री महेश बब्बर, विजय जग्गा, राकेश सुखीजा, राकेश राजदेव, शिवम जग्गा, सतीश सुखीजा, राजेश छाबड़ा आदि थे।

रुद्रपुर लक्ष्मी नारायण मंदिर में पुरोहित को कलश व फलों का दान करते लोग।- फोटो : RUDRAPUR

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