लोहियाहेड पावर हाउस की मुख्य नहर में 31 अगस्त की प्रात: हुए ओवर फ्लो से मची तबाही के बाद विद्युत जनन खंड के उत्पादन को पटरी पर लाने में सरकार को लगभग 9.25 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। पावर हाउस एवं नहर के जीर्णोद्धार में अब भी तमाम खामियां साफ झलक रही हैं। पावर हाउस से बाहर निकलने वाले पानी के लिए नहर के तटबंध पिचिंग, सीमेंट की बनाई गई पटरी, पट्टियां कई जगह धंसने लगी हैं। यह हाल नहर के एक तरफ ही नहीं बल्कि नहर के दोनों ओर है। जहां सीमेंट की खड़ी पट्टियों पर दरारें और उनके नीचे के पत्थर अपना स्थान छोड़ चुके हैं।
उधर, विद्युत जनन खंड की तीन टरबाइनों में से अभी तक बमुश्किल एक मशीन लगभग 14 मेगावाट बिजली उत्पादन की रही है।