शहर के तीन सितारा होटल रेडिसन की छत से गिरकर घायल हुए मासूम धैर्य वशिष्ठ को न्याय दिलाने के लिए 50वें दिन शहरवासियों के सब्र का बांध टूट गया। होटल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लोगों ने सड़क पर उतरकर होटल के गेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया। पुलिस प्रशासन ने होटल प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता कराकर मामले को शांत करने का प्रयास किया। वार्ता विफल होने पर प्रदर्शनकारियों ने बृहस्पतिवार को डीएम और एसएसपी को ज्ञापन सौंपने का एलान किया।
बता दें कि बीते वर्ष 26 नवंबर को होटल रेडिसन में आयोजित एक कार्यक्रम में गया शांति विहार कॉलोनी निवासी योगेश वशिष्ठ का ढाई वर्षीय बेटा धैर्य होटल की छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसका गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के 50 दिन बीतने के बाद भी होटल प्रबंधन ने धैर्य की कोई सुध नहीं ली।
इससे गुस्साए धैर्य के परिजनों ने बुधवार को क्षेत्रवासियों के साथ जुलूस निकालकर होटल के गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एहतियातन बेरिकेडिंग कर यातायात कुछ देर के लिए रोक दिया। इधर, लोगों का कहना था कि होटल प्रबंधन की लापरवाही से बच्चा छत से गिरा, बावजूद इसके होटल प्रबंधन ने न तो बच्चे की सुध ली और न ही उसके इलाज के लिए कोई आर्थिक मदद ही दी।
वहां कांग्रेसी नेता सुशील गाबा, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, भाजपा नेता अजय तिवारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा, विकास शर्मा, अवतार सिंह, राकेश शर्मा बीडी भट्ट, सौरभ बेहड़, हीरा, उमा, सावित्री, गीता भाकुनी, रेखा, भगवती, पुष्पा, चंपा आदि थे।
इनसेट
पहले ढाई लाख, अब पांच लाख मुआवजे के बाद भी वार्ता विफल
रुद्रपुर। धरने पर बैठे लोगों ने धैर्य के इलाज का खर्च होटल प्रबंधन की ओर से उठाने की मांग की। इस पर कोतवाल केसी भट्ट की मौजूदगी में होटल प्रबंधक नरेंद्र पठानिया और प्रदर्शनकारियों की करीब एक घंटे की वार्ता भी कराई गई। वार्ता में पठानिया ने घटना पर दुख जताते हुए कर्मचारियों से चंदा कर तीन लाख रुपये तत्काल और दो लाख रुपये का चेक देने की बात कही लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने।
होटल स्वामी से जब विधायक राजकुमार ठुकराल ने फोन पर बात की तो उन्होंने खुद को बीमार बताते हुए अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। इसके बाद सीईओ से बात हुई और सीईओ ने कानूनी रूप से मामले का निस्तारण करने की बात कही, जिस पर वार्ता विफल हो गई। विधायक ने जीएम को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रबंधन चाहे तो सीएसआर मद से धैर्य के इलाज का खर्च उठा सकता है। बता दें कि पूर्व में भी होटल प्रबंधन की ओर से दिए गए ढाई लाख के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों की वार्ता विफल हो गई थी।
होटल प्रबंधन सतर्क होता तो नहीं होता हादसा
रुद्रपुर। लोगों का कहना था कि धैर्य के घायल होने के मामले में यदि होटल प्रबंधन पहले से सतर्क होता तो यह घटना ही नहीं होती। उनका आरोप है कि होटल में जिस जगह से धैर्य गिरा था, वहां ऊंचाई अधिक होने के बाद भी प्रबंधन की ओर से रेलिंग नहीं लगाई गई थी। इसी लापरवाही का धैर्य शिकार हो गया। इधर, धैर्य के साथ हादसा होने के बाद होटल प्रबंधन उक्त स्थान पर रेलिंग लगाकर सुरक्षा का दावा कर रहा है।
बेटे के इलाज के लिए घर तक बेच चुका भाई : राकेश
रुद्रपुर। धैर्य के होटल से गिरकर घायल होने की घटना को याद कर उसके ताऊ राकेश शर्मा फफक पड़े। उन्होंने प्रबंधन को खरीखोटी सुनाते हुए बताया कि उनके भाई योगेश शर्मा ने बेटे के इलाज के लिए अपना घर तक बेच दिया है। 30 लाख से अधिक अब तक खर्च हो चुके हैं।
मोहल्लेवासी भी चंदा कर रहे हैं लेकिन प्रबंधन का दिल नहीं पसीज रहा है। उन्होंने फफकते हुए कहा कि प्रबंधन ने लापरवाही न की होती तो धैर्य आज अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष नहीं कर रहा होता। जनवरी में धैर्य को तीन वर्ष पूरे होने पर परिजन उसका जन्मदिन भी नहीं मना पाए।