गदरपुर/गूलरभोज/पंतनगर। जलाशय निर्माण के कारण विस्थापित हुए हजारों परिवारों को 60 वर्षों बाद भी भूमि का मालिकाना हक न मिलने का गंभीर मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंचा है। शनिवार को पंतनगर एयरपोर्ट पर सांसद अजय भट्ट के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और विस्थापितों को तत्काल स्वामित्व अधिकार देने की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सौंपे पत्र में कहा कि वर्ष 1962-65 के बीच जलाशय निर्माण के लिए विस्थापितों की 1203 एकड़ पक्की भूमिधरी जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले उन्हें भूमि तो मिली लेकिन मालिकाना हक नहीं। बताया कि 70 के दशक में वन विभाग की 685 एकड़ भूमि को सिंचाई विभाग ने लिया था। चूंकि यह प्रकरण वन अधिनियम 1980 से पूर्व का है, इसलिए इसे राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस 685 एकड़ भूमि पर हजारों परिवार अपने पक्के आवासों, दुकानों और कृषि के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इसी भूमि के 30 एकड़ भू-खंड पर नवनिर्मित नगर पंचायत गूलरभोज के चार वार्ड हैं। यहां करोड़ों के विकास कार्य हो रहे हैं और ग्राम पंचायत गोविन्दपुर, कोपा, कुल्हा, मटकोटा सहित कई क्षेत्रों में रेलवे स्टेशन, स्वास्थ्य केंद्र, अनाज मंडी और स्कूल जैसे सरकारी संस्थान दशकों से संचालित हैं।
इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएम नितिन सिंह भदौरिया को तत्काल इस प्रकरण की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। भाजपा प्रदेश मंत्री गुंजन सुखीजा और चेयरमैन सतीश चुघ ने कहा कि विस्थापितों को उनका हक दिलाना सरकार की प्राथमिकता है और यह उनके चुनावी घोषणा पत्र का भी हिस्सा है।
प्रतिनिधिमंडल में रघुवीर सिंह संधू, शंभूप्रसाद जोशी, विश्वजीत मंडल, गोपाल मिस्त्री, साहिब सिंह, कुलजीत सिंह, मनजीत सिंह आदि शामिल रहे।