जसपुर के मोहल्ला पूर्वी छीपियान जटवारा में खेलते समय हुए जरा से विवाद में एक बच्चे ने दूसरे बच्चे के सीने में चाकू मार दिया। गंभीर हालत में घायल बच्चे को काशीपुर के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
मोहल्ला पूर्वी छीपियान जटवारा निवासी तसलीम अहमद का 12 वर्षीय पुत्र मोहम्मद ईशान सोमवार दोपहर को मोहल्ले के ही विधि विवादित बच्चे (11) के साथ बैडमिंटन खेल रहा था। इस दौरान शटल कॉक नाली में चली गई। बताया जा रहा है कि मोहम्मद ईशान ने कॉक को निकालकर विधि विवादित बच्चे की तरफ फेंक दी। कपड़ों पर गंदगी की छींटे पड़ने से गुस्साए विधि विवादित बच्चे ने पहले मोहम्मद ईशान को बैडमिंटन से मारा। विवाद बढ़ता गया तो विधि विवादित बच्चे ने गुस्से में जेब में रखे चाकू से ईशान के सीने पर वार कर दिया।
घायल अवस्था में मोहम्मद ईशान ने पास के मेडिकल स्टोर से जख्म पर पट्टी करा ली ताकि घाव भर जाए। घर की ऊपरी मंजिल से घटना देख रही उसकी मां ने खून निकलता देखा तो अपने दूसरे बेटे को नीचे भेजा। इसी दौरान मोहम्मद ईशान बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। परिजन उसे तत्काल निजी अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टर ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।
इसके बाद परिजन बच्चे को काशीपुर के एक निजी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। जसपुर पुलिस घटना की गहनता से जांच कर रही है। तहरीर मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खेल-खेल में हुई लड़ाई, बच्चे की जान पर बन आई
मोहल्ला छिपयान जटवारा में खेल-खेल में हुए विवाद में घायल हुआ 12 वर्षीय मोहम्मद ईशान खुद ही घर न जाकर पास के मेडिकल स्टोर की ओर चल पड़ा। उसके मन में यही होगा कि छोटी सी चोट है, पट्टी करा लूंगा और घर लौट आऊंगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मेडिकल स्टोर पर मौजूद युवक ने उसके घाव पर मरहम लगाया ही था कि वह अचानक बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा। यह देख मेडिकल स्टोर पर अफरातफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे परिजन आननफानन उसे अस्पताल ले गए लेकिन तब तक काफी खून बह चुका था। अस्पताल में चिकित्सकों ने तमाम कोशिशें कीं लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
सबसे छोटा और लाडला था ईशान
ईशान अपने घर का सबसे छोटा और लाडला बेटा था। उसके पिता तसलीम अहमद घर से करीब 20 मीटर दूर हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं। पिता के मुताबिक, ईशान नगर के अब्दुल कादिर जीलानी एकेडमी में कक्षा सात में पढ़ता था। उसे पढ़ाई-लिखाई का शौक था और वह अच्छे अंक हासिल करता था। बेटे की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। छोटे भाई को खोने के गम में बड़े भाई मोहम्मद फैजान (17) का रो-रोकर बुरा हाल है।
कुछ दिनों से चाकू लेकर घूम रहा था विधि विवादित बच्चा
इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। मोहल्लेवासियों के अनुसार, इसी वजह से वह स्कूल भी नहीं जाता था। वह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर का है जबकि उसकी दो बहनें स्कूल जाती हैं। इस घटना से एक परिवार में मातम है तो दूसरे घर में सभी स्तब्ध हैं। घटना ने बच्चों की संगत, उनकी गतिविधियों और छोटी उम्र में हाथों में खतरनाक वस्तुएं पहुंचने को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
चूक रहा धैर्य, अपराध की ओर बढ़ रहे कदम
कभी छोटी-मोटी चोरी और झगड़ों तक सीमित रहने वाला किशोर अपराध अब संगीन जुर्म की दहलीज तक पहुंच रहा है। काशीपुर सर्किल क्षेत्र में एक पखवाड़े में हत्या की तीन वारदातें हो चुकी हैं। खास बात यह है कि इन तीनों वारदातों में किशोरों की लिप्तता प्रकाश में आई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन वारदातों में मुख्य भूमिका या सहयोगी के रूप में 11 से 17 वर्ष के किशोर शामिल थे।
बच्चों के बीच बढ़ती अपराध की प्रवृत्ति न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, बल्कि यह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संकट का संकेत है। सोशल मीडिया पर गैंगस्टर कल्चर, गाली-गलौज और बदले की कहानियों को हीरो के रूप में दिखाना। किशोर उसे असल जिंदगी समझ लेते हैं। काशीपुर में बीती 16 अगस्त को ग्राम बाजावाजा निवासी टैंट व्यवसाई संदीप कुमार की हत्या हुई। इस वारदात को दो किशोरों ने अंजाम दिया। हत्या करने का उनका तरीका भी बेहद शातिराना था। इसमें से एक किशोर के मृतक की पत्नी से अवैध संबंध होने की बात सामने आई। वहीं 20 अगस्त, 2026 को विशालनगर कालोनी निवासी कांति झा की हत्या में डंपर चालक राजू सिंह के साथ किशोर हेल्पर की भूमिका भी उजागर हुई। हालिया मामला जसपुर की लकड़ी मंडी का है। यहां खेल-खेल में हुए विवाद में एक किशोर ने दूसरे किशोर इशान के सीने में चाकू घोंपकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। वहीं 21 अगस्त, 2025 को एक छात्र ने कुंडेश्वरी रोड स्थित एक स्कूल के अध्यापक को गोली मारकर घायल कर दिया था। इन मामलों का अगर विश्लेषण करें तो कुछ समान कारक निकलते हैं। तात्कालिक आवेश अथवा मामूली कहासुनी के बाद तुरंत बदला लेने की प्रवृत्ति भी इसकी एक वजह है। चाकू, पेचकस, लाठी जैसे हथियारों की सुलभ उपलब्धता इन वारदातों में सामने आ रहा है।
अपराध में कम हो रहा है उम्र का लिहाज
सेवानिवृत्त सीओ हरीश मेहरा का कहना है कि अब अपराध में उम्र का लिहाज खत्म हो रहा है। पहले किशोर डरते थे, अब उनमें कानून का डर कम है क्योंकि उन्हें पता है कि किशोर न्याय बोर्ड से उन्हें हल्की सजा मिलेगी। इसका वे गलत फायदा उठाते हैं। साथ ही उन्हें मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना भी एक बड़ा कारण है। उनका कहना है पकड़े गए अधिकांश किशोरों की पारिवारिक पृष्ठभूमि में टूटा हुआ परिवार, घरेलू हिंसा या अत्यधिक लाड़-प्यार में से कोई एक कारण जरूर मिलता है।
पहले भी किशोरों पर चाकू तान चुका है आरोपी
जसपुर की लकड़ी मंडी में किशोर की हत्या करने का आरोपी पहले भी कई किशोरों को मारने के लिए चाकू लेकर आ चुका है। मृतक के परिजनों के मुताबिक आरोपी पूर्व में किशोरों को चाकू से डराने की हरकत कर चुका है।
इशान के ननिहाल में छाया सन्नाटा
मृतक इशान का ननिहाल काशीपुर के मोहल्ला काजीबाग का है। काजीबाग के अली अहमद ने अपनी बेटी नर्गिस का विवाह जसपुर निवासी तस्लीम से किया था। उसके दो पुत्र हैं। इशान की हत्या से उसके ननिहाल में शोक व्याप्त है। हत्या की सूचना मिलने पर सैकड़ों की संख्या में उनके रिश्तेदार व परिचित पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। उसकी महिला रिश्तेदारों का रो रोकर बुरा हाल है। संवाद -----
मोबाइल ने बिगाड़ी बच्चों की मनोदशा, हाथों में स्क्रीन
जसपुर में दो मासूमों के बीच हुई दुखद घटना ने बच्चों की बिगड़ती मनोदशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इसका बड़ा कारण मोबाइल और इंटरनेट की लत है। पहले जहां शाम होते ही मोहल्लों में गिल्ली-डंडा, क्रिकेट और लुका-छिपी की आवाजें गूंजती थीं, अब वही मैदान सूने पड़े हैं। बच्चों के हाथ में बल्ला नहीं, मोबाइल है।
नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल के मनोचिकित्सक डा. मणिभूषण पंत ने बताया कि दिनभर रील्स, शॉर्ट वीडियो और हिंसक गेम्स देखने से बच्चों का दिमाग हर समय तेज उत्तेजना में रहता है। छोटी-छोटी बात पर चिड़ना, गाली देना और हाथ उठा देना आम हो गया है। गेम और वेब सीरीज में चाकू-मारपीट को सामान्य दिखाया जाता है। 11-12 साल का बच्चा वास्तविकता और वर्चुअल दुनिया में फर्क नहीं कर पाता और उसी की नकल कर लेता है। मोबाइल में सब कुछ एक क्लिक पर मिलता है। इंतजार करना, हार को स्वीकार करना बच्चे भूल गए हैं। खेल में हारते ही गुस्सा फूट पड़ता है।
बच्चों में खत्म हो रही सहनशक्तिराजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर की असिस्टेंट प्रोफेसर मनोचिकित्सक डा. आकृति जायसवाल ने बताया कि रात-रात भर मोबाइल चलाने से नींद पूरी नहीं होती, जिससे दिमाग थका रहता है और सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है। 11-12 साल की उम्र में बच्चों में सही-गलत, गुस्से पर नियंत्रण और परिणाम समझने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। इस उम्र में आवेग बहुत तेज होता है। छोटी सी कहासुनी, हार-जीत का गुस्सा, या अपमान महसूस होने पर बच्चा बिना सोचे प्रतिक्रिया कर देता है।
यह करें परिजन
- बच्चों के लिए मोबाइल का समय निश्चित करें
- बच्चों को शाम को एक घंटा मैदान में खेलना अनिवार्य करें
- बच्चों के रात के समय मोबाइल का प्रयोग बंद करें
- इंटरनेट की एक्सिस फुल ना दें, एजुकेशन कंटेंट दें
- स्कूल में होने वाली बुलिंग के बारे में बच्चों से बात करें
- बच्चा क्या देख रहा है, किससे बात कर रहा है, इस पर नजर रखें, जासूसी नहीं, दोस्ती से
- 14 साल से कम उम्र के बच्चों को निजी स्मार्टफोन न दें