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आस्था और विश्वास ही भक्ति का मूल उदेशीय: महाराज

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बाजपुर के जानकी मंडप में मौजूद श्रद्धालु। - फोटो : BAZPUR
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बाजपुर। कृष्ण कृपा मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से चली सात दिनी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी लक्ष्मण दास महाराज ने कहा कि जब तक हमारे जीवन में आस्था नहीं होगी। तब तक हमें ईश्वर के दर्शन संभव नहीं है। अगर जीवन में आस्था है तो बंद द्वार में भी रास्ते बन जाते हैं। आस्था ही भक्ति का मूल उद्देश्य है। अगर जीवन में आस्था नहीं है तो मूर्ति भी पत्थर के समान है।
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बुधवार को जानकी मंडप में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान महाराज ने कहा कि दूसरे के दुख को दूर कर सुख पहुंचाना ही देवत्व कार्य है। परमात्मा भी उसी का साथ देते हैं जो दूसरों का दुख दूर करने का प्रयास करते हैं। बृहस्पतिवार को धूमधाम के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान आयोजकों की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए सैनिटाइजर और मास्क की भी व्यवस्था की गई। वहां राजू, गीता, रविंद्र बंसल, टीकाराम, संजीव जिंदल, राधेश्याम गर्ग, श्री निवास, रेखा, कुसुम आदि थे।
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