साढ़े पांच माह पूर्व मजदूर की हत्या कर पानी में फेंकेे गए शव के मामले का खुलासा न होने से आक्रोशित लोगों ने कोतवाली गेट पर धरना दिया और पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक पाल ने कहा कि हत्यारोपियों को बचाने के लिए पुलिस मामले में लापरवाही बरत रही है।
उन्होंने पुलिस से जल्द हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने व पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि बीती 25 जुलाई को वार्ड संख्या दो निवासी इरशाद अहमद (मजले) सिडकुल फेज टू में सीमेंट उतारने गया था और वहां से लापता हो गया। दो दिन बाद फेज टू में सड़क किनारे खंती में उसका शव पानी में तैरता मिला था। परिजनों ने इरशाद की हत्या कर शव खंती में फेंकने की आशंका जताई थी और पुलिस को तहरीर दी थी। इस पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन, तब से अभी तक हत्याकांड का खुलासा नहीं हुआ। पाल ने कहा कि गत 30 नवंबर को नई बस्ती लौका में दलित परिवार की झोपड़ी जला दी गई।
तहरीर देने के बाद भी पुलिस ने अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर कोतवाल बीएस भाकुनी ने झोपड़ी जलाने के आरोपियों के खिलाफ सप्ताह भर के भीतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। वहां अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष हाजी अनवार अहमद, कांग्रेसी नेता यूसुफ मलिक, गुरसाहब सिंह गिल, गंगा सागर, आजम मलिक, जावेद सिद्दीकी, तस्लीम अहमद आदि थे।