फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोटाले में किसने खेला कौन सा खेल

Tue, 07 Nov 2017 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की गिरफ्त में आने के बाद जेल भेजे गए आठ लोगों की जांच में एसआईटी ने इस बात का खुलासा किया कि किसी ने बैक डेट में भूमि की 143 कराकर तो किसी ने 143 के फर्जी दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया। किसानों ने भूमि की गलत रिपोर्ट पर करोड़ों का मुआवजा लेकर खुद को गुनहगार बना दिया।
विज्ञापन


भगत सिंह फोनिया (एसडीम) - जसपुर तहसील में कई मामलों में बैक डेट में भूमि की 143 की गई।
अनिल कुमार (संग्रह अमीन) - जसपुर तहसील में बैक डेट में कई मामलों की 143 कराई गई।
मदन मोहन पलड़िया - काशीपुर तहसील में रहकर आर-6 और आर-5 रजिस्ट्री में गलत रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
भोलेलाल - जसपुर में प्रभारी तहसीलदार रहने के दौरान बैक डेट में भूमि की 143 करने के कई मामले।
रामसमुझ - जसपुर तहसील में अनुसेवक रहकर 143 के कुछ मामलों को बैक डेट में मिसलबंद रजिस्टर में दर्ज किया।
जीशान- काशीपुर तहसील में काशीपुर के ही एक वकील के साथ मिलकर काश्तकारों की भूमि की बैक डेट में 143 कराकर करीब चार लाख से अधिक का कमीशन लिया गया।
ओम प्रकाश - जसपुर में स्थित अपनी भूमि का बैक डेट में 143 कराकर पांच करोड़ से अधिक का गलत मुआवजा लिया।
चरन सिंह - जसपुर में स्थित अपनी भूमि का बैक डेट में 143 कराने के बाद दस करोड़ का मुआवजा लिया और अफसरों को लाखों का कमीशन दिया गया।
एसडीम और तहसीलदार ने जमानत को दिया प्रार्थना पत्र
एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी द्वारा गिरफ्तार करने के बाद निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया के साथ ही तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पलड़िया और सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भोलेलाल ने सोमवार को कोर्ट में पेश होने के बाद जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। मंगलवार को अदालत उन पर सुनवाई कर अपना फैसला देगी।
जीशान के बाद अब अधिवक्ता भी एसआईटी के रडार पर
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी की रडार पर काशीपुर का एक वकील भी है। सूत्रों के अनुसार काशीपुर के वकील ने कुछ तहसील कर्मियों के साथ मिलकर काश्तकारों की जमीन की बैक डेक में 143 कराकर करोड़ों का मुआवजा लिया। सोमवार को जेल भेजे गये काशीपुर के स्टांप वेंडर जीशान की भी इस वकील के साथ मिलीभगत सामने आई है। वकील की काल डिटेल से यह भी खुलासा हुआ कि घोटाले के दौरान वकील घोटाले के मुख्य आरोपी से लगातार संपर्क में रहा। बताया जा रहा कि वकील काशीपुर में एक राजनीतिक दल में भी अपनी पैठ रखता है और कुछ समय पूर्व काशीपुर क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुका है। अपने चुनावी खर्च को लेकर भी वकील क्षेत्र में चर्चा में रहा था।
विज्ञापन

करोड़ों का कमीशन लेने वाला डाटा एंट्री ऑपरेटर भी फरार
काशीपुर तहसील में संविदा पर डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम करने वाले युवक की तलाश में भी एसआइटी गहनता से जुटी है। बताया जा रहा है कि उसने बिचौलिया बनकर किसानों की जमीन की बैक डेट में 143 कराई और कमीशन से तत्कालीन अफसरों के साथ ही अपनी भी जेब भरी। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेटर ने एसआईटी की गिरफ्त में आए जसपुर के किसान ओमप्रकाश और उसके भाई की जमीन की बैक डेट में 143 कराई और उसके एवज में दोनों किसानों ने ऑपरेटर और उसके पिता को 50 लाख और ऑपरेटर के भाई को पांच लाख समेत कुल एक करोड़ पांच लाख रुपये के चेक दिए। इस प्रक्रिया के दौरान ऑपरेटर की घोटाले के मुख्य आरोपी से अगस्त 2016 से मार्च 2017 तक 117 बार फोन पर बात हुई जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि ऑपरेटर ने मुख्य आरोपी को भी कमीशन का मोटा हिस्सा दिया। फिलहाल किसान ओमप्रकाश ही एसआईटी की गिरफ्त में आया है। किसान के भाई और डाटा एंट्री ऑपरेटर की धरपकड़ के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
अपराध को देखकर धाराओं में हुआ परिवर्तन
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी की जांच के बाद कानून के शिकंजे में फंसे नौ सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों के अपराध को देखते हुए कोर्ट ने उन पर लगाई गई धाराओं में परिवर्तन किया है। तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन द्वारा घोटाला उजागर करने के बाद एडीएम प्रताप शाह द्वारा 10 मार्च 2017 को घोटाले में लिप्त अज्ञात सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारी लोगों के खिलाफ पंतनगर थाने में अपराध संख्या 32,17 में धारा 167, 218, 219, 420, 409, 466, 467, 468, 471, 474, और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। सोमवार को एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किये गये आठ लोगों को कोर्ट में पेश करने के बाद कोर्ट ने जहां सरकारी कर्मचारियों के पर लगी सभी धाराओं को यथावत रखा है वहीं गैर सरकारी कर्मचारियों पर 420, 466, 467, 468, 471, 120 बी और धारा 34 आईपीसी रखी गई है।

अब तक 6 पीसीएस पर गिरी निलंबन की गाज
एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाले में छह पीसीएस अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है, जिसमें एसएलओ डीपी सिंह, एसडीएम अनील शुक्ला, नंदन सिंह नगन्याल, भगत सिंह फोनिया, जगदीश चंद्र, सुरेंद्र सिंह जंगपांगी शामिल हैं। इसके साथ ही जसपुर तहसील के पेशकार विकास चौहान और सितारगंज तहसील में कार्यरत अहलमद संतराम को जेल भेजा गया जिसमें से संतराम को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। घोटाले की तह तक जाने के लिए एसआईटी जहां अब तक करीब 90 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, वहीं 100 के करीब लोगों को एसआईटी द्वारा नोटिस भेजा गया। दो दिन पूर्व भी एसआईटी द्वारा 12 लोगों को नोटिस भेजा गया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के साथ ही कमीशन के खेल में मध्यस्थता करने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें