केयू परीक्षा शाखा के डुप्लीकेट सर्टिफिकेट सेक्शन पहुंची टीम, ढाई घंटे चली जांच
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
फर्जी डीएमसी प्रकरण में अब तक केयू के दो कर्मियों सहित पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सोमवार सुबह अपराध शाखा की टीम ने केयू परीक्षा शाखा के डुप्लीकेट सर्टिफिकेट सेक्शन में जांच की। यहां पुलिस टीम ने एक महिला कर्मचारी सहित अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। यह जांच करीब ढाई घंटे तक चली। इस दौरान केयू की परीक्षा शाखा में अफरा-तफरी मची रही। हालांकि शाम तक यह चर्चा फैली रही कि पांच कर्मचारियों को पुलिस ने राउंड अप किया है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामकुमार ने बताया कि पुलिस ने कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की है। उनके सहित कुंटिया के कुछ अन्य नेता जांच करने आई पुलिस टीम से मिले थे। उन्होंने भी पुलिस से अपील की है कि जो लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन, केवल किसी का नाम लिए जाने पर उसे दोषी मानना और उसके साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि केयू का स्टाफ भी जांच में पुलिस का सहयोग कर रहा है। चार दिन पहले आजाद नगर में फर्जी डीएमसी तैयार करने वाले गिरोह के खुलासे के बाद अब तक केयू के दो कर्मचारियों सहित कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक गिरफ्तार हुए पांच आरोपियों से दो पुलिस रिमांड पर हैं। दो को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। रविवार देर शाम को गिरफ्तारी के बाद पांचवें आरोपी राजकुमार को सोमवार अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बता दें कि पुलिस ने गिरोह के सदस्यों से करीब 30 असली डीएमसी बिना प्रिंट बरामद की थी। कुछ डीएमसी पर नाम पते और नंबर चढ़ाए हुए थे। आरोपी को अदालत में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
रविवार देर शाम को हुई एक की गिरफ्तारी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के नकली डीएमसी मामले में पुलिस की अपराध शाखा ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। रविवार देर शाम कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बतौर कर्मचारी कार्यरत राजकुमार को गिरफ्तार किया गया। यह आरोपी गिरोह को डीएमसी की असल बिना प्रिंट कॉपी मुहैया कराता था। आरोपी की पहचान राजकुमार निवासी थानेसर शहर के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
चार दिन पहले ही फिर से ज्वॉइन किया था राजकुमार ने
आरोपी राजकुमार पहले भी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आउट सोर्सिंग पर नौकरी कर चुका है। चार दिन पहले ही उसने आउट सोर्सिंग पॉलिसी के तहत फिर से ठेकेदार के माध्यम से ज्वाइन किया था। इससे पहले आरोपी विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा में तैनात था। उसकी ड्यूटी प्रिंटिंग प्रेस से कार्यालय तक बिना प्रिंट की कापियां लाने की थी।
प्रिंट प्रेस से परीक्षा शाखा के बीच बंडल से निकलता था डीएमसी
पुलिस पूछताछ में राजकुमार ने स्वीकार किया कि वह प्रिंटिंग प्रेस से डीएमसी लाते समय रास्ते में ही चुरा लेता था। आरोपी ने माना है वह परीक्षा शाखा में कार्यरत था। वह प्रिंटिंग प्रेस से सैकड़ों की संख्या में बिना प्रिंट हुई डीएमसी लेकर आता था। उसकी ड्यूटी बिना प्रिंट हुई डीएमसी की प्रतियों को परीक्षा शाखा में दूसरे कर्मचारियों को हैंडओवर करने की थी। इस दौरान वह रास्ते में ही उनमें से 4-5 कॉपी निकाल लेता था। इसके बाद वह बिना प्रिंट ही कापियों को गिरोह के सदस्यों तक पहुंचा देता था।