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घास काट रहे मजदूर को बाघ ने मारा

Sun, 12 Nov 2017 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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खेत पर चारो ओर फैला था शकूर का खून - फोटो : अमर उजाला
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गन्ने के खेत में घास काटने गए एक मजदूर पर बाघ ने हमला कर दिया और मजदूर को उठाकर पास के खेत में ले गया। साथी मजदूर को बाघ के हमले का आभास तक नहीं हुआ। साथी मजदूर ने उसे गायब देख ग्रामीणों के साथ खोजबीन की तो पास वाले गन्ने के खेत में उसका शव लहूलुहान पड़ा था। इससे गांव में दहशत फैल गई है।
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बाघ पकड़ने के लिए वन विभाग, पुलिस ने गांव में डेरा डाल दिया। एसडीएम ने मौका मुआयना कर वन विभाग को गांव के लोगों की सुरक्षा, बाघ को ट्रैप करने के लिए कैमरे लगाने के निर्देश दिए।
 कैलाश नदी के तट पर बसे तुर्कातिसौर गांव का निवासी शकूर अहमद (48) पुत्र मो. शफी मजदूरी करता था। शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे शकूर अपने पड़ोसी मो. रफीक के साथ घर से करीब सौ मीटर की दूरी पर स्थित जरनैल सिंह के गन्ने के खेत में घास काटने गया। शकूर, रफीक खेत में ही कुछ ही दूरी पर घाट काट रहे थे। 
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इसी बीच गुरवचन सिंह के बराबर वाले गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने शकूर पर हमला कर दिया। बाघ का हमला इतना जबरदस्त था कि शकूर शोर भी नहीं कर सका और बाघ उसे घसीटते हुए गुरवचन के खेत में ले गया। रफीक ने जब आवाज लगाई तो शकूर का जवाब न मिलने पर उसने देखा तो शकूर खेत में नहीं था। यह देख उसने जरनैल के खेत में ही ढूंढखोज की और फिर तुरंत उसके घर पहुंच परिजनों को बताया तो परिजन गांव के अन्य लोगों के साथ उसकी तलाश में जुट गए। शकूर का शव गुरवचन के खेत पड़ा मिला। 

यह देख ग्रामीणों में दहशत फैल गई और परिजनों में भी कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। कोतवाल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और बाराकोली के रेंजर प्रदीप कुमार धौलखंडी, एसडीएम विनोद कुमार को बाघ के हमले की जानकारी दी। वनकर्मियों ने घटनास्थल पर तलाशी अभियान चलाया और बाघ के पंजों के निशान लिए। एसडीएम विनोद कुमार ने एसडीओ वन प्रकाश चंद्र आर्य से फोन पर वार्ता कर गांव में निगरानी रखने और बाघ को ट्रैप करने के उपकरण लगाने को कहा। कोतवाल बीएस भाकुनी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए खटीमा भेजा।

वन विभाग ने 20 हजार की तात्कालिक सहायता राशि दी
तराई पूर्वी वन प्रभाग के एसडीओ प्रकाश चंद्र आर्य ने पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 20 हजार रुपये दिए। कहा कि वन विभाग की ओर से पीड़ित के परिवार को तीन लाख रुपये मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट डीएफओ की भेजी जाएगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से भी मुआवजा दिलाने को प्रयास किए जाएंगे। 

वन एसडीओ ने मुआयना किया 
तराई पूर्वी वन प्रभाग के एसडीओ प्रकाश चंद्र आर्य ने तुर्कातिसौर गांव पहुंचकर घटना का स्थलीय निरीक्षण किया और मातहतों को ग्रामीणों की सुरक्षा, निगरानी रखने के निर्देश दिए। बाराकोली के रेंजर प्रदीप कुमार ने बताया कि गांव में डिप्टी रेंजर दीपचंद्र सिंह महरा, वन दरोगा एनएस नेगी, प्रेम आर्य के नेतृत्व में वन टीमें तैनात की गई हैं। बाघ को पकड़ने के लिए गन्ने के खेत, आसपास की झाड़ियों में कांबिंग की जा रही है। बाघ पकड़े जाने तक गांव में वन टीम डेरा डाले रहेगी। बताया कि नदी किनारे और खेतों के आसपास कैमरे लगाए जा रहे हैं। कहा कि बाघ तराई पूर्वी के जंगल से यहां आया या फिर पीलीभीत जिले में आतंक फैलाने वाले बाघों में से एक है, यह भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एहतियात बरतें। खुले में शौच को न जाएं। खेतों में काम करने अकेले न जाएं। टोलियां बनाकर घूमें। बच्चों को घरों के आसपास खाली मैदान, खेतों में न जानें दें। 

वन विभाग ने नहीं दिखाई गंभीरता
पिछले सप्ताहभर से गांव में बाघ का आतंक है। इसके बावजूद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश है। बाघ रात को कैलाश नदी के तट, गेहूं, गन्ने के खेत में पाया गया। शुक्रवार रात बाघ खेत में मरी भैंस को भी खींच कर ले गया और उसे अपना शिकार बनाया। बीडीसी सूरज नारायण ने बताया कि तीन माह पहले भी गांव में बाघ दिखने से लोग भयभीत थे। वन विभाग को बाघ के गांव में घुसने की सूचना दी गई थी। वन टीम ने मुआयना किया तो बाघ के विचरण के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे लेकिन, अब सप्ताह भर से गांव के किनारे बाघ के पंजे देखे गए। हाइवे और गांव की आबादी के बीच गन्ने के खेत में बाघ के होने से ग्रामीण दहशतजदा हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल ही बाघ को पकड़ने की मांग की है। ब्यूरो

हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा 
तुर्कातिसौर गांव का मजदूर शकूर अहमद की बेटी की शादी का सपना अधूरा ही रह गया। शकूर ने अपने सात बच्चों में से सबसे बड़े बेटे और एक बेटी की शादी की थी। दूसरी बेटी शहजादी का रिश्ता हल्द्वानी से किया था। जल्द ही उसकी शादी भी होनी थी। शकूर शादी की तैयारी में जुटा था। बाघ के हमले से हंसते खेलते शकूर के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। शकूर नदी में सब्जी भी उगाता था। गांव में हर धर्म, जाति के लोगों से उसकी पहचान थी। वह मिलनसार भी था। 

शकूर ने दोपहर में परिवार के साथ बैठकर खाना खाया और फिर घर में पल रही बकरियों के लिए पड़ोस के ही रफीक के साथ घास काटने चला गया, पर उसके परिवार को क्या पता था कि अब शकूर नहीं लौटेगा। गन्ने के खेत से जब ग्रामीण शव घर लाए तो पत्नी फरीदा बानो, अविवाहित दोनों बेटियां गश खाकर गिर पड़ीं। परिजनों ने बताया कि शकूर का सबसे बड़ा बेटा मो. अहमद पंजाब में मजदूरी करता है। उससे छोटी बेटी की शादी हो चुकी है। कुछ दिन पहले शकूर ने अपनी दूसरी बेटी शहजादी का रिश्ता हल्द्वानी के युवक से तय कर दिया। 

बाघ आया.. बाघ आया की अफवाह सच हो गई 
क्षेत्र में चल रही बाघ आया.. बाघ आया.. की अफवाह आखिरकार आज सच हो गई। अब से तकरीबन तीन माह पहले वर्षाकाल के दिनों में यूपी के पीलीभीत जनपद में विभिन्न गांवों में बाघों का आतंक रहा। उस दौरान यूपी से सटे क्षेत्र के गांव बिज्टी, पटिहा, तुर्कातिसौर, कैलाशपुरी, रसोइयापुर, शुक्लाफार्म, बघौरी आदि गांवों में शेर देखे जाने की अफवाह फैली थी और लोग दहशत में थे। सप्ताह भर से तुर्कातिसौर गांव में बाघ की सूचना को विभाग ने अफवाह ही माना। वन विभाग भी इसको लेकर गंभीर नहीं दिखा। अगर, पहले दिन से ही बाघ देखे जाने के मामले पर वन विभाग गंभीर होता तो शायद मजदूर को जान नहीं गंवानी पड़ती। 
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