सुल्तानपुर पट्टी नगर पंचायत में अनियमितताओं का मामला शासन पहुंच चुका है। तहसीलदार की जांच में नगर पंचायत अध्यक्ष, लिपिक और तत्कालीन ईओ दोषी पाए गए थे और डीएम ने तीनों पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शहर विकास निदेशक को भेजी थी। निदेशक ने शहरी विकास सचिव को तीनों के खिलाफ कठोर अनुशासनिक कार्रवाई करने की संस्तुति की है।
बीते 1 जुलाई को मोहल्ला श्यामनगर सुल्तानपुर पट्टी निवासी हाजी अली हुसैन ने डीएम से नगर पंचायत में धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सात बिंदुओं पर शिकायत की थी। डीएम के आदेश पर तहसीलदार बाजपुर ने जांच कर शिकायतों को सही पाया और 8 अक्टूबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। डीएम ने 20 जनवरी को कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट निदेशक शहरी विकास निदेशालय को भेजी थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि नगर पंचायत अध्यक्ष जुम्मा भारती, तत्कालीन ईओ एसडी भट्ट और वरिष्ठ लिपिक देवनाथ मिश्रा ने वर्ष 2014, 2015 में 89,171 रुपये के आठ चेक गलत ढंग से अवनीश कुमार गुप्ता के नाम से काटे थे। अवनीश का नगरपंचायत में न तो रजिस्ट्रेशन है और न ही सभी चेकों का कोई कोटेशन, निविदा निकाली गई। कोई सामान खरीदने से पहले तीन लोगों के नाम से कोटेशन या निविदा निकालना अनिवार्य है। सरकार हर सात सात लाख रुपये प्रकाश व्यवस्था को नगर पंचायत को देती है, इसलिए फुटकर सामान लेने का औचित्य नहीं बनता।
तीनों ने लाइट के नाम पर 93,171 रुपये की अनियमितता की गई है। टैक्सी से यात्रा करने के नाम पर 40,037 रुपये और सफाई मद पर 55,070 रुपये खर्च करने में वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है। निदेशक शहरी विकास के हवाले से अपर निदेशक नवनीत पांडे ने सचिव शहरी विकास विभाग को बीते 7 अप्रैल को पत्र भेजकर तीनों पर कठोर अनुशासनिक कार्रवाई करने की संस्तुति की है। उन्होंने रिपोर्ट में लिखा है कि लिपिक देवनाथ मिश्रा के संबंध में कार्रवाई का अधिकारी नगर पंचायत अध्यक्ष को है। लेकिन अध्यक्ष खुद जांच की परिधि में है तो उनके द्वारा मिश्रा के खिलाफ निकाय स्तर से कार्रवाई किए जाने की संभावना नहीं है।