रास्ते में रोककर एक व्यक्ति से मारपीट करने और उसका कान चबाने के आरोपी तीन सगे भाइयों को सिविल जज प्रवर खंड लक्ष्मण सिंह ने दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
सरकारी वकील परवेज आलम ने बताया वार्ड 8 रंपुरा निवासी रामबहादुर पुत्र भगीरथ ने दर्ज रिपोर्ट में कहा था कि 19 अक्टूबर 2011 की रात 9 बजे वह अपने घर जा रहा था रास्ते में खडे वार्ड 7 रंपुरा के तोताराम, नन्हे व भगत पुत्रगण रामचरन ने घेरकर मारपीट शुरू कर दी विरोध करने पर दांतों से उसका कान काट लिया।
तीनों के विरुद्ध सिविल जज प्रवर खंड लक्ष्मण सिंह की कोर्ट में मुकदमा चला जिसमें एपीओ परवेज आलम ने गवाह पेश कर आरोप सिद्ध कर दिया। न्यायाधीश ने तीनों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और तीन-तीन सौ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
चोरी के तीन आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा
कार्यालय से 7 लाख रुपए चुराने के आरोपी को 3 वर्ष के कठोर कारावास और चोरी के दो अन्य आरोपियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी।
दिनेश अग्रवाल पुत्र राम अवतार ने रिपोर्ट लिखायी थी कि आवास विकास रुद्रपुर में उनका कार्यालय है जिसमें ग्राम हामिदनगर थाना बिलासपुर जिला रामपुर निवासी डेनिस पुत्र डेविड काम करता था। 27 जुलाई 2013 की शाम करीब 4 बजे जब कार्यालय में कोई नही था तो डेनिस ने दराज तोड़कर उसमें रखे 7 लाख 20 हजार रुपए चुरा लिए और फरार हो गया। पुलिस ने 30 जुलाई 2013 को जोसफ नगर तिराहे के पास डेनिस को पकड़ लिया और उससे 6 लाख 70 हजार रुपए बरामद कर जेल भेज दिया। उसके विरुद्ध सिविल जज प्रवर खंड लक्ष्मण सिंह की कोर्ट में मुकदमा चला जिसमें एपीओ परवेज आलम ने गवाह पेशकर आरोप सिद्ध कर दिया जिसके बाद कोर्ट ने डेनिस को 3 वर्ष के कठोर कारावास व 2000 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
बैग छीनकर भागे दो युवकों को तीन-तीन साल की कैद
ग्राम पहाड़ी चेतिर थाना नहटोर जिला बिजनौर यूपी निवासी रामरतन सिंह पुत्र डुंगर सिंह ने रिपोर्ट लिखायी थी कि विजय सिंह उसे ट्रैक्टर दिलवाने के लिए लाए थे। 16 जुलाई 2008 को विजय ने उसको डिगर सिंह पुत्र शेर सिंह निवासी ग्राम राजीवनगर बिंदुखत्ता थाना लालकुआं से मिलवाया। उसके साथ शांतिनगर बिन्दुखत्ता थाना लालकुआं का किशोर धामी पुत्र शंकर सिंह भी था। वे ट्रैक्टर दिखाने के लिए शक्तिफार्म ले जा रहे थे कि रास्ते में जंगलात चौकी के पास रोककर उसका ढाई लाख रुपए से भरा बैग छीन कर भाग गये। पुलिस ने दोनों को 6 अगस्त 2008 को पकड़ लिया। दोनों के खिलाफ सिविल जज प्रवर खंड लक्ष्मण सिंह की कोर्ट में मुकदमा चला जिसमें सरकारी वकील परवेज आलम ने गवाह पेशकर आरोप सिद्ध कर दिया। कोर्ट ने दोनों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।