भूमि मुआवजा घोटाले में भले ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने एसआईटी को अपने अधिकारियों की जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। लेकिन, अब भी एसआईटी की ओर से तैयार किया जा रहा तीसरा आरोप पत्र एनएचएआई को कठघरे में खड़ा कर सकता है।
अभियोजन आदेश नहीं मिलने पर एसआईटी एनएचएआई के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकती, लेकिन एनएचएआई के खिलाफ मिले पुख्ता साक्ष्यों को अपने तीसरे आरोप पत्र में दर्ज करेगी, जिस पर न्यायालय संज्ञान ले सकता है।
भूमि मुआवजा घोटाले में एनएचएआई के तीन पीडी (प्रोजेक्ट डायरेक्टर) और एक एपीडी के खिलाफ अनियमितता के साक्ष्य मिलने पर एसआईटी ने जुलाई में चारों के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति के लिए एनएचएआई मुख्यालय को पत्र लिखा था। बीते बृहस्पतिवार को एनएचएआई ने शासन के साथ ही पुलिस मुख्यालय को अवगत कराते हुए अपने अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
सूत्रों के अनुसार जांच की अनुमति न देने के पीछे एनएचएआई का तर्क है कि भू अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे का वितरण एसएलओ की ओर से किया गया, जिसमें उसके अधिकारी कहीं दोषी नहीं हैं। साथ ही एनएचएआई के अधिकारी पहले ही संदिग्ध मामलों को आर्बिट्रेशन में लेकर गए। लेकिन, एसआईटी जांच में एनएचएआई के खिलाफ कई ऐसे साक्ष्य मिले थे, जिनमें एनएचएआई ने बैक डेट में 143 की गई भूमि पर पहले मुआवजा बांटा और जिन मामलों को आर्बिट्रेशन में लेकर जाना था, उन्हें लेकर नहीं गई।
कुछ मामलों को घोटाला उजागर होने के बाद एनएचएआई की ओर से आर्बिट्रेशन में ले जाया गया। उक्त सभी साक्ष्यों को एसआईटी ने अपनी केस डायरी में शामिल किया है और एनएचएआई की ओर से जांच के लिए इनकार करने पर अब एसआईटी पूरे घोटाले में एनएचएआई की भूमिका के साथ तमाम साक्ष्यों को तीसरे आरोप पत्र में दर्ज करने की तैयारी कर रही है। उस पर न्यायालय संज्ञान ले सकता है। माना जा रहा है कि कोर्ट के संज्ञान लेने पर एनएचएआई कठघरे में खड़ी हो सकती है।