क्षेत्र में नंधौर, कैलाश और बैगुल नदी में अवैध खनन और मिट्टी खुदान से नदी किनारे बसे दर्जन भर गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, सिडकुल का गेस्ट हाउस, हैलीपेड, संपूर्णानंद शिविर खुली जेल, सेंट्रल जेल व बीएसएफ और एसएसबी के बटालियन केंद्र कैलाश नदी के मुहाने पर हैं। नदी में अवैध खनन को लेकर प्रशासन नहीं चेता तो 11 वर्ष पहले बेतरतीब खनन के कारण आई भीषण बाढ़ की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। उस वक्त करीब 18 लोगों की बाढ़ के पानी में बहकर जान चली गई थी।
नंधौर व कैलाश नदी के उकरौली व साधूनगर खनन क्षेत्र में माफियाओं का राज है। माफिया खनन पट्टों के अलावा वन व निजी भूमि पर जमकर अवैध खनन कर रहे हैं। नदी में बेतरतीब तरीके से खनन होने के कारण साधूनगर, उकरौली, संतफार्म, नकुलिया, कैलाशपुरी, थारु तिसौर, डोहरा, एंजनिया, पथरियाफार्म, औदली समेत दर्जन भर गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा सिडकुल भी बाढ़ के मुहाने पर है। बीते दिनों माफियाओं ने हैलीपेड के पास पट्टे और अनुमति के बिना जमकर अवैध खनन किया। इससे करोड़ों की लागत से बने हैलीपेड व गेस्ट हाउस के ढहने की आशंका पैदा हो गई है। वहीं, बालाजी एक्शन प्राइवेट लिमिटेड, बीएसएफ और एसएसबी बटालियन केंद्र, संपूर्णानंद शिविर खुली जेल एवं सेंट्रल जेल, बिजलीघर, पेयजल ओवरहेड टैंक को बाढ़ से नुकसान की संभावना है।
नदी में अवैध खनन से क्षेत्र के लोगों में बाढ़ का भय बना हुआ है। बता दें कि करीब 11 साल पूर्व वर्ष 2004 में नंधौर व कैलाश नदी में अवैध खनन होने के कारण भीषण बाढ़ आई थी। जिसमें कैलाश नदी का पुल धराशायी हो गया था और करीब 18 लोग काल के गाल में समां गए थे। कहा कि अगर इस बार नदी में अवैध खनन यूं ही जारी रहा तो 11 साल पहले आई बाढ़ की पुनरावृत्ति हो सकती है।