टीडीसी में फसल के लिए तैयार किए जाने वाला गेहूं बीज बेचने के लिए शासन से सख्त नियमावली बनी है। इसके बाद भी कर्मचारियों और वितरकों ने घोटाले को अंजाम देने के लिए नियमों को अनदेखा कर बीज फ्लोर मिलों में खपा दिया। वर्ष 2009-10 में बीज को फ्लोर मिलों में बेचे जाने की आशंका पर शासन ने इस पर सख्ती बरती थी।
शासन की नियमावली के मुताबिक बीज अधिकृत डीलर को ही बेचा जाएगा। बीज क्रय करने वाला किसान स्टांप पर लिखकर प्रमाण देगा कि वह बीज बुआई के लिए ही इस्तेमाल करेगा। बीज बेचने से पूर्व वितरक अपने अभिलेखों में किसान, उसके खेत और फार्म का विवरण दर्ज करेगा। जिला कृषि अधिकारियों की ओर से वितरकों का रजिस्टर सत्यापित किया जाएगा।
बता दें कि टीडीसी पंतनगर में डिमांड के अनुसार गेहूं बीज तैयार कर उसे फसल के लिए ट्रीट किया जाता है। नियम है कि बिना ट्रीट किए बीज को बेचने से पहले फ्लोर मिलों से टेंडर लिए जाएंगे। इसके बाद ही नीलामी के माध्यम से बीज बेचा जाएगा। बीज खरीदने वाले फ्लोर मिल भी टीडीसी को बीज खरीदने का शपथपत्र देंगे। लेकिन, फ्लोर मिलों और सीड प्लांट को बीज बेचने में किसी भी नियम को पूरा नहीं किया गया।
वर्ष 2009-10 में भी बीज को हल्द्वानी के एक वितरक की ओर से फ्लोर मिलों में बेचने का अंदेशा होने पर तत्कालीन प्रमुख सचिव कृषि विनीता कुमार ने सख्ती से नियमों का पालन करने के लिए तत्कालीन एमडी को निर्देशित किया था। हालांकि बाद में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।
इनसान और जानवरों के काम नहीं आता ट्रीट बीज
रुद्रपुर में टीडीसी पंतनगर में फसल के लिए तैयार किया गया गेहूं बीज जहरीला होने के कारण इनसान तो दूर जानवरों के खाने योग्य भी नहीं होता। ट्रीट बीज के पैकेट पर भी स्पष्ट अंकित किया जाता है कि यह इनसान या जानवर के खाने योग्य नहीं है। इसके बाद भी फ्लोर मिलों ने बीज को खपा दिया। ट्रीट बीज से सिर्फ कपड़ों में चढ़ाया जाने वाला माड़ तैयार किया जा सकता है।
इस बात का भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि कर्मचारियों ने बीज को कागजों में ट्रीट दिखाकर फ्लोर मिलों को शुद्ध बीज बेचा है। यदि मिलों की ओर से ट्रीट किया गया बीज बेचने के साक्ष्य मिलते हैं तो मिल स्वामियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।