20 लाख रुपये की ऋण वसूली करने पहुंची राजस्व विभाग की टीम की हिरासत से छूटे किसान ने घर में जहरीला पदार्थ गटक लिया। इससे मौके पर मौजूद तहसीलदार, संग्रह अमीन समेत अन्य राजस्व कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। परिजन किसान को तत्काल सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
समाचार लिखे जाने तक परिजनों की ओर से पुलिस को तहरीर नहीं सौंपी गई थी, जबकि राजस्वकर्मी मोहम्मद सादिक ने कोतवाली में किसान के खिलाफ गालीगलौच, फावड़ा लेकर जान से मारने की धमकी तथा सरकारी काम में बाधा डालने की तहरीर दी है। बता दें कि किसान ने अक्तूबर 2014 में बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपये फसली ऋण लिया था। इसके बाद उसने लोन की एक भी किस्त नहीं चुकाई। लोन की राशि अब ब्याज सहित 20 लाख रुपये हो गई है।
तहसीलदार विपिन चंद्र पंत, संग्रह अमीन मोहम्मद सादिक, अनिल कुमार गुप्ता, अशोक कुमार छाबड़ा और सुरेश जोशी शनिवार को ग्राम डियोढार निवासी किसान बूटा सिंह पुत्र छिंदा सिंह के घर पहुंचे। तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने किसान बूटा सिंह को हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठा लिया।
किसान ने तहसीलदार को बताया कि उसके लोन का मामला कोर्ट कमिश्नर की अदालत में विचाराधीन है लेकिन राजस्वकर्मी किसान की बात अनसुनी कर उसे तहसील ले जाने लगे तो किसान ने जीप से छलांग लगा दी और टीम पर हमलावर हो गया। इसके बाद किसान ने घर में जाकर जहरीला पदार्थ गटक लिया। इससे राजस्व टीम के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे रेफर कर दिया।
10 एकड़ जमीन का मालिक है किसान
सितारगंज। बूटा सिंह के परिवार में उसकी पत्नी, दो बच्चे और एक भाई व एक बहन हैं। उनके एक बच्चे की उम्र सात साल व दूसरे की 12 साल है। उनका भाई जर्मनी में है। बहन की शादी हो चुकी है। परिजनों के मुताबिक बूटा सिंह के पास दस एकड़ कृषि भूमि है, जिस पर वह खेती करता है।
बैंक ऑफ इंडिया से कृषि लोन लिया था किसान ने : तहसीलदार
सितारगंज। तहसीलदार विपिन कुमार पंत ने बताया कि बूटा सिंह पर बैंक ऑफ इंडिया का 20 लाख रुपये कर्ज का बकाया था। सात मई को उसका बैंक से रिकवरी सर्टिफिकेट आ गया था, जिसकी वसूली करने के लिए वह टीम के साथ डियोढार उसके घर पहुंचे। वहां वसूली की रकम मांगने पर किसान ने इसे चुकाने से साफ इनकार कर दिया। तहसीलदार ने कहा कि किसान मामला कोर्ट में विचाराधीन होने की बात करते रहा। किसान ने उनकी टीम को वसूली स्थगित संबंधी कोई आदेश भी नहीं दिखाया। इस पर उनकी टीम उसे अरेस्ट करने आगे बढ़ी तो गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने आंगन में रखा फावड़ा उठा लिया और उन पर हमला करने को दौड़ा। उसके परिजनों ने बीच बचाव किया। इसके बाद वह फरार हो गया। उन्होंने फोन पर पुलिस को मामले की सूचना दी और टीम के साथ गांव में ही दूसरी वसूली करने निकल गए। इसी बीच, उसने कार्रवाई से बचने के लिए साजिश के तहत जहर खाने योजना बना ली।
किसान की पत्नी ने लगाया अभद्रता का आरोप
सितारगंज। किसान बूटा सिंह की पत्नी सुखदीप कौर ने तहसीलदार विपिन पंत और संग्रह अमीन की टीम पर उसके पति, परिजनों और परिवार की महिलाओं के साथ अभद्रता करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि टीम ने आते ही उसके पति के साथ गालीगलौज और हाथापाई शुरू कर दी। पति के यह बताने पर कि उनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है, टीम ने उनकी एक नहीं सुनीं। तहसीलदार व उनकी टीम ने उसके पति को जबरदस्ती गाड़ी में बैठा दिया, जिससे उसके पति को गहरा आघात पहुंचा और उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
पूर्व में दो किसानों की जा चुकी है जान
सितारगंज। डियोढार निवासी किसान बूटा सिंह लगातार फसल चौपट होने के चलते बैंक का कर्जा नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते बैंक ऑफ इंडिया से लिया कृषि लोन 20 लाख रुपये तक पहुंच गया है। किसान ने लोन न जमा करा पाने के कारण कोर्ट कमिश्नर की अदालत में वाद दायर कर न्याय की गुहार भी लगाई थी। बावजूद इसके राजस्व विभाग की ओर से वसूली की सख्ती के चलते उसने जहरीला पदार्थ गटक लिया। बता दें कि इससे पूर्व मई 2018 में लोन को लेकर बिज्टी निवासी मुख्त्यार सिंह उर्फ पप्पू सिंह पुत्र करम सिंह ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी थी। वहीं, विरिया भूड़ निवासी मस्सा सिंह पुत्र गुरमेज सिंह की बैंक का नोटिस मिलने से लगे सदमे के चलते हार्टअटैक से से मौत हो गई थी। अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह फौजी और गुरसाहब सिंह गिल ने प्रशासन पर किसानों के साथ बेरुखी एवं अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।