पंतनगर सिडकुल में जहां चीन और थाईलैंड की कंपनियां भारी निवेश के लिए उत्साहित हैं, वहीं देश की प्रसिद्ध टाटा कंपनी ने यहां स्थित सूमो का प्लांट बंद कर दिया है। इससे करीब 1200 कर्मचारियों पर रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उधर, टाटा प्रबंधन का कहना है कि डिमांड कम होने से सूमो का प्लांट फिलहाल बंद करना पड़ रहा है, जबकि कंपनी सूत्रों का कहना है कि टाटा अपना प्लांट अब पूना या गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने जा रहा है।
बता दें कि 15 अप्रैल को पंतनगर सिडकुल में टाटा कंपनी को केंद्र सरकार से मिलने वाली एक्साइज छूट खत्म हो रही है। इससे कंपनी अब अपना प्लांट कहीं अन्यंत्र शिफ्ट करने की तैयारी में है। वर्ष-2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने ही पंतनगर सिडकुल को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल करते हुए यहां 500 से अधिक उद्योगों को स्थापित किया था। एनडी तिवारी पंतनगर सिडकुल में टाटा को कंपनी की शर्तों पर लाए थे। इसमें एयरपोर्ट के ही नजदीप विशाल भूखंड में टाटा को जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद टाटा ने यहां व्यापक स्तर पर उत्पादन किया। अपनी लखटकिया नैनो कार के प्लांट को भी टाटा ने यहां स्थातिप किया था, लेकिन चार साल पहले टाटा ने नैनो के प्लांट को यहां से अन्यत्र शिफ्ट कर दिया।
उधर फैक्ट्री सूत्रों का कहना है कि पंतनगर सिडकुल में टाटा ने ट्रकों का उत्पादन भी 50 प्रतिशत कम कर दिया है। इस तरह से लगातार घट रहे टाटा के उत्पादन से यहां काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार छिनने का भय सताने लगा है। टाटा के फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक वर्तमान में टाटा कंपनी से करीब दस हजार लोग सीधे तौर पर रोजगार से जुड़े हैं, इसमें करीब पांच हजार लोग स्थाई कर्मचारी है और पांच हजार वेंडर कंपनियों से जुड़े हैं, जिनमें सिक्योरिटी, कैंटीन और लेबर कांट्रेक्ट के जरिए भी लोग रोजगार से जुड़े हैं। सूमो प्लांट बंद होने से करीब 1200 कर्मचारी प्रभावित होंगे।
फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि सूमो की डिमांड कम होने के कारण प्लांट को फिलहाल बंद करने का निर्णय कारपोरेट से लिया गया है। डिमांड बढ़ी तो फिर से प्लांट सुचारू किया जा सकता है, जबकि फैक्ट्री के ही सूत्रों का कहना है कि टाटा आरिस कार का प्लांट भी बंद करने की तैयारी में है और इसे धारवाड़ गुजरात में शिफ्ट किया जा सकता है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्तमान में टाटा के ट्रकों की भी बाजार में डिमांड कम हो गई है, इसलिए पंतनगर सिडकुल के टाटा प्लांट में फिलहाल ट्रकों का उत्पादन भी सीधे तौर 50 प्रतिशत तक घट गया है, इससे भी टाटा से जुड़ी वेंडर कंपनियों के कर्मचारियों में घबराहट है।