जमीनों की धोखाधड़ी में फंसी प्रिया शर्मा और सुधीर चावला अपनी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को ट्रांसफर कराने के लिए 52 दिन तक पुलिस के साथ लुकाछिपी का खेल खेलते रहे। इसके लिए प्रिया ने सीएम कार्यालय में गुहार लगाने के बाद गिरफ्तार होने तक जांच के ट्रांसफर होने का इंतजार किया। गिरफ्तार होने के बाद उसने पुलिस से भी दो दिन का समय मांगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दरअसल प्रिया और सुधीर के खिलाफ 21 जनवरी को मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों पुलिस से बचने के लिए दिल्ली निकल गए थे। भूमिगत प्रिया ने अपनी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को ट्रांसफर करवाने के लिए नैनीताल हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। फिर प्रिया ने सीएम कार्यालय में गुहार लगाई और सीएम कार्यालय से जांच ट्रांसफर होने की आस में दिल्ली के अलग-अलग होटलों में ठिकाना बदलती रही। सुुधीर भी कुछ समय के लिए जयपुर चला गया। बीती एक मार्च को सुधीर ने अपनी कार गुरुग्राम के सहारा मॉल में पार्क की थी। ऊधमसिंह नगर पुलिस को सर्विलांस से दोनों की लोकेशन दिल्ली में मिली तो वहां रहने वाले प्रिया के एक परिचित को पुलिस ने भरोसे में ले लिया।
16 मार्च को मॉल प्रबंधन ने गुरुग्राम की एमजी रोड चौकी पुलिस को उनकी पार्किंग में लावारिस कार खड़े होने की सूचना दी। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें सुधीर का मोबाइल मिला। पुलिस ने मौके से कार नहीं हटाई। पुलिस ने मोबाइल में मौजूद दिल्ली के उसी नंबर पर संपर्क किया, जिसे रुद्रपुर पुलिस पहले ही अपने विश्वास में ले चुकी थी। इससे रुद्रपुर पुलिस को सुधीर की कार मिलने की भनक मिल गई। पुलिस को प्रिया की उसके परिचित से हो रही व्हाटसएप चेट से भी लगातार उसके बारे में जानकारी मिल रही थी। पुलिस ने सहारा मॉल के आसपास डेरा जमाकर 20 मार्च को मॉल से बाहर निकलते समय दोनों को दबोच लिया।