काशीपुर की शबीना के शव का तीन डाक्टरों की टीम ने मंगलवार को पोस्टमार्टम किया। शव करीब तीन महीने पुराना होने के कारण डॉक्टर अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं। फिलहाल डॉक्टरों ने डीएनए और विसरा की जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है। वहीं शबीना का शव हल्के-फुल्के विरोध के बीच मुफ्ती की राय के मुताबिक नौगजा पीर कब्रिस्तान स्थित पुरानी कब्र में दफना दिया गया।
विजयनगर नई बस्ती निवासी रहमत अली के बेटे नवाब अली ने 2007 में जसपुर निवासी इशहाक की बेटी शबीना से प्रेम विवाह किया था। 21 अक्तूबर 2017 को शबीना की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शबीना के भाई मेहंदी हसन ने अदालत में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया कि उसकी बहन को ससुरालियों ने प्रताड़ित किया और खाने में जहर देकर मारा था। मौत के बाद ससुरालियों ने बिना बताए शव को सुपुर्देखाक कर दिया। अदालत ने धारा 156(3) के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने पति सहित ससुराल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। थाना प्रभारी चंचल शर्मा ने तहसीलदार की देखरेख में कब्रिस्तान से शव निकालने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेज दिया। यहां डॉ. भावना जंगपांगी, डॉ. अतुल सक्सेना और डॉ. अर्जित दत्ता की टीम ने पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि इस मामले में डीएनए परीक्षण के साथ विसरा की जांच कराई जाएगी। विसरा से पता लगेगा कि महिला को जहर दिया गया था या नहीं। शव पुराना होने के कारण उसका पूरा विश्लेषण संभव नहीं है।
इधर, देर शाम मृतका के परिजन उसका शव लेकर काशीपुर के नौगजा कब्रिस्तान पहुंचे। सूचना पर कब्रिस्तान पहुंचे कमेटी के सरपरस्त हसीन खान, सदर नूर हसन और सचिव मुख्तार खान ने वहां शव दफन करने का विरोध किया। उनका कहना था कि शव पुन: उसी कब्र में दफन करने के बारे में किसी मुफ्ती से राय ली जाए। शहर इमाम मुफ्ती मुनाजिर हुसैन ने बताया कि मृतका की जनाजे की नमाज पहले हो चुकी है। उसे गुसल भी दिया जा चुका है। शरीयत के मुताबिक बगैर किसी रस्म अदायगी के उसका जनाजा पुरानी कब्र में दफनाया जा सकता है। मुफ्ती की राय पर कब्रिस्तान कमेटी ने वहां शव दफनाने की इजाजत दे दी। उसके बाद शव पुरानी कब्र में दफन कर दिया गया।