सितारगंज में स्थापित सिडकुल का क्षेत्रीय कार्यालय।
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सिडकुल कार्यालय सितारगंज में तीन साल से आरएम का पद खाली पड़ा है। शासन द्वारा स्थाई नियुक्ति न कर पंतनगर-रुद्रपुर के आरएम को ही यहां का चार्ज दिया गया है, जिससे सिडकुल के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उद्योगपतियों को छोटे-छोटे कामों के लिए 65 किमी दूर पंतनगर आरएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। नए उद्यमियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष-2005 में संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की लगभग 1193 एकड़ भूमि पर सिडकुल की स्थापना की हुई थी। शासन की ओर से यहां सिडकुल का क्षेत्रीय कार्यालय खोला गया और रुद्रपुर सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक को यहां का चार्ज दिया गया।
2012 से 2014 तक आरएम की नियमित तैनाती की गई। उसके बाद यहां का चार्ज पंतनगर-रुद्रपुर के आरएम को दे दिया गया। जबकि वर्ष 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सिडकुल में ही फेज टू की स्थापना की।
जहां नये-नये उद्योगों का आना जारी है। देश ही नहीं, वरन विदेश तक की कंपनियां सिडकुल में उद्योग लगाकर हजारों करोड़ों का निवेश करने जा रही हैं, लेकिन सिडकुल कार्यालय में क्षेत्रीय प्रबंधक न होने से उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
तहसीलदार और सर्वे नायब भी नहीं
तहसीलदार और सर्वे नायब तहसीलदार का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। 17 अप्रैल को तहसीलदार सुदेश कुमार के स्थानांतरण के बाद किच्छा के नायब तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल को प्रभार सौंपा गया है। सर्वे कार्यालय में भी नायब तहसीलदार का पद खाली पड़ा है। बीते दिसंबर से वरिष्ठ सर्वे कानूनगो उमाकांत मिश्रा को नायब तहसीलदार की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन 20 अप्रैल को उनसे प्रभार वापस लेने के बाद यह पद पूरी तरह खाली हो गया। सर्वे नायब तहसीलदार के न होने से 20 गांवों के सर्वेक्षण का कार्य ठप पड़ा है। कार्यालय में तैनात पांच सर्वे लेखपाल और छह सर्वे कानूनगो सिर्फ विभागीय कार्य में ही व्यस्त हैं।