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वनकर्मी ने रंजीत को मार डाला, शव बरामद   

Tue, 07 May 2019 12:56 AM IST
yashwant yashwant अमर उजाला ब्यूरो
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गूलरभोज में हत्या आरोपियों को फांसी देने की मांग करते ग्रामीण।गूलरभोज में हत्या आरोपियों को फांसी देने की मांग करते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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बौर जलाशय में नाव सवार युवकों पर हुई फायरिंग में लापता हुए रंजीत सिंह उर्फ मिट्ठू का शव तीसरे दिन जलाशय में उतराता मिला है। पुलिस ने आरोपी वनकर्मी को गिरफ्तार करने के साथ ही घटना में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है। पुलिस की माने तो आरोपी ने गोली मारने की बात कबूल की है। युवक के मुंह पर कपड़ा ठुंसा होने से आशंका जताई जा रही है कि पहले उसे मारापीटा गया और मरने के बाद उसे जलाशय में डाल दिया गया। ग्रामीणों की माने तो करीब तीन माह पहले ककराला गांव में आरोपी वनरक्षक राजेश कुमार ने फायरिंग की थी और राजेश को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इधर, पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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 शनिवार तड़के करीब तीन बजे बौर जलाशय में नाव पर सवार दो युवकों पर दूसरी नाव पर सवार वन कर्मी और दो अन्य लोगों ने फायरिंग की थी। इसमें नाव सवार गुरजीत उर्फ जित्ता तो जलाशय में कूदकर बच गया, लेकिन उसका साथी रंजीत नाव सहित लापता हो गया था। रंजीत की पत्नी की तहरीर पर एसडीआरएफ की टीम जलाशय में रंजीत की तलाश में सर्च अभियान चला रही थी। सोमवार सुबह एसडीआरएफ की टीम को बौर जलाशय के कट से पश्चिम दिशा की ओर से शव उतराता दिखाई दिया। शव को बाहर निकाला गया तो उसकी पहचान रंजीत के रूप में हुई। शव की बायीं छाती पर छर्रे के निशान होने के साथ ही मुंह में कपड़ा ठूंसा था।

इधर, पुलिस हिरासत में आरोपी वन रक्षक राजेश कुमार ने कबूल किया है कि उसने ही नाव सवार ग्रामीणों पर फायरिंग की थी। पहले हवाई फायर किए थे और उनके नहीं रुकने पर तीसरा फायर नाव पर किया था, जो कि रंजीत को लगा था। रंजीत घायल होने के बाद पानी में डूब गया था। राजेश की निशानदेही पर पुलिस ने फायरिंग में प्रयुक्त 12 बोर का तमंचा भी बरामद हुआ है। बकौल राजेश कई बार लकड़ी तस्करों का पीछा करने पर ये लोग अपने हथियार छोड़ जाते हैं, यह बंदूक भी उसे ऐसे ही मिली थी। इधर, थानाध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने बताया कि मृतक के शरीर पर छर्रों के 16 निशान थे। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मृतक ने गले में कपड़ा डाला होगा, जो डूबने के समय मुंह में फंसा होगा। वनकर्मी की गिरफ्तारी की जानकारी उसके विभाग के उच्चाधिकारियों को दे दी है।
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पति के हत्यारे को हो फांसी की सजा
गूलरभोज। पुलिस जैसे ही शव को गूलरभोज सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची तो पीछे पीछे मृतक की पत्नी प्रीतो कौर ग्रामीणों के साथ वहां पहुंच गई। सभी ने हत्यारों को फांसी की सजा की मांग की। ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन भी किया, पति के शव को देखकर प्रीतो बेसुध हो गई। प्रदर्शन करने वालों में मंगो कौर, राणो कौर, कुलवंत कौर, मंजीत कौर, शीला कौर, प्रीत कौर, बिंद्रो कौर, जिंद्रो, रमेश कौर, जंगीर सिंह, मक्खन सिंह, राजपाल सिंह जसवंत सिंह आदि कई ग्रामीण थे।

आरोपी वन रक्षक पर बढ़ी दो और धाराएं
गूलरभोज। फायरिंग मामले में रंजीत का शव मिलने के बाद आरोपी वन रक्षक राजेश कुमार पर पुलिस ने धारा 307 के अलावा अवैध असलहा बरामद होने पर आर्म्स एक्ट की धारा भी बढ़ा दी है। राजेश पर रविवार को ही हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। चौकी प्रभारी मनोहर चंद ने बताया कि शव मिलने के बाद राजेश पर अब दो धाराएं और बढ़ाई गई हैं। 
सुरक्षा की दृष्टि से सतर्क रही पुलिस
गूलरभोज। शव मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से डेढ़ सेक्शन पीएसी बुलावा ली थी। हालांकि ग्रामीणों में आक्रोश तो था ही पर उसने उग्र रूप नहीं लिया।

सरकारी असलहे से नहीं किया फायर
गूलरभोज। पीपलपड़ाव रेंज में तैनात और हत्या के आरोपी वनरक्षक राजेश कुमार को विभाग की ओर से 315 बोर की बंदूक आवंटित हुई थी। घटना के वक्त राजेश के पास आवंटित बंदूक के साथ तमंचा भी था। ग्रामीणों की माने तो तमंचे से फायर करना यह साबित करता है कि राजेश की रंजीत से कोई निजी खुन्नस थी और उसने गोली उसे मारने के लिए ही चलाई थी।

वन रक्षक पर होगी विभागीय कार्रवाई
गूलरभोज। वन रक्षक पर विभाग अलग से विभागीय कार्रवाई करेगा। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि यदि किसी अपराध में कोई विभागीय कर्मचारी 48 घंटे से अधिक समय तक जेल में रहता है उस पर विभाग निलंबन की कार्रवाई करेगा। बताया कि निलंबन के बाद उक्त कर्मचारी को चार्जशीट दी जाएगी। विभाग की ओर से वन रक्षक को असलहा आवंटित है लेकिन किसी पर फायरिंग तभी की जा सकती है जब खुद की जान को खतरा हो। साथ ही फायरिंग का प्रयास यह होना चाहिए कि जनहानि न हो। पुलिस की जांच में यदि उसने अवैध बंदूक से फायर करना कबूला है तो उसका स्पष्टीकरण भी विभाग उससे मांगेगा।

गैरइरादतन नहीं है यह है हत्या
गूलरभोज। हालात जो गवाही दे रहे हैं उसके मुताबिक रंजीत की गैरइरादतन नहीं, जानबूझकर हत्या की गई है, ग्रामीण भी यही बात कह रहे हैं। लोगों की माने तो इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि लकड़ी की तस्करी में कमीशन बाजी का खेल भी होता है। लकड़ी की तस्करी वन विभाग की सरपरस्ती में होती है, जिसने भी वन कर्मी को नजरंदाज करने की कोशिश की उसका हश्र रंजीत जैसा ही होता है।

 ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन महीने पहले ककराला गांव में वनरक्षक राजेश कुमार ने फायरिंग की थी और गांव के मंगल सिंह के परिवार को जमकर पीटा था। इसमें मंगल सिंह की टांग में चोट भी आई थी। इसकी शिकायत भी पुलिस चौकी में की गई थी। गांव के कई लोगों ने उस समय वनरक्षक पर कई आरोप भी लगाए थे। इन्हीं आरोपों से नाराज वन कर्मी राजेश कुमार रंजीत सिंह से निजी दुश्मनी खुन्नस रखने लगा था।

ग्रामीणों के सामने ही उसने रंजीत को गोली से मारने की धमकी भी दी थी और सोमवार को रंजीत का शव मिलने के साथ यह बात सच भी साबित हो गई। कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया की इस रेंज में राजेश कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान 10 से 12 बार फायरिंग कर चुका है। पहले वह दहशत फैलाने के लिए फायरिंग करता था, लेकिन इस बार जान लेने के लिए फायरिंग की। अपुष्ट रूप से यह भी चर्चा है कि फायरिंग के बाद छर्रे लगने से घायल हुए रंजीत को वनकर्मी ने पकड़ा और उसे मारा पीटा। इस दौरान उसकी मौत होने पर रंजीत का शव जलाशय में डालकर वन कर्मी मौके से भाग गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया फायरिंग के आरोपी राजेश की विभाग बारीकी से जांच करे तो उसके कार्यकाल में लकड़ी तस्करी का प्रतिशत काफी बढ़ा है।

पीपलपड़ाव, गदगदिया, बरहैनी और टांडा रेज है संवेदनशील
गूलरभोज। लकड़ी तस्करी में मामले में तराई केंद्रीय वनप्रभाग हल्द्वानी की पीपल पड़ाव, गदगदिया, बरहैनी और टांडा रेंज अति संवेदनशील है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन सब रेंजों में 10 से 12 बार फायरिंग हो चुकी है। एसडीओ किच्छा के अनुसार उनके दो वर्ष के कार्यकाल में कई बार लकड़ी तस्करों और वन कर्मियों में झगड़े और फायरिंग की घटनाएं हुई है। वन कर्मी भी इस झड़प में चोटिल हो चुके हैं। उनकी तहरीरों के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई भी की गई है। बताया कि किसी की जान गई हो ऐसा पहला मामला सामने आया है।

तस्करी रोकने के करेंगे ठोस उपाय
गूलरभोज। वन विभाग के आला अधिकारियों ने कहा कि खुफिया तंत्र को तेज कर लकड़ी तस्करी रोकने के ठोस उपाय किए जाएंगे। सचल दस्ते के वन दरोगा कैलाश तिवारी ने बताया कि उनके दो साल के कार्यकाल में गदगदिया, बरहैनी, पीपलपड़ाव और टांडा रेंज से लकड़ी चोरी की धरपकड़ के लगभग 60 केस पकड़े जा चुके हैं। इन रेंजो में सबसे अधिक खैर, सागौन, शीशम, साल और यूकेलिप्टिस के पेड़ बहुतायत में हैं। अधिकतर खैर की लकड़ी की तस्करी होती है। विभाग के अनुसार लकड़ी तस्करी में गांव के अधिकांश ग्रामीण संलिप्त हैं। कई ग्रामीणों पर तो फायरिंग करने के मुकदमे भी दर्ज हैं। 
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