पूर्व प्रधान छोटे लाल हत्याकांड का फरार दूसरे आरोपी गोपी ने बृहस्पतिवार दोपहर बाद नाटकीय ढंग से कोतवाली में सरेंडर कर दिया है। बताया जाता है कि पुलिस का बढ़ता दबाव और गोपी के घर और रिश्तेदारों के यहां लगातार दी जा रही दबिश के कारण आखिरकार गोपी को आत्मसमर्पण करना पड़ा है।
पुलिस गोपी से हत्याकांड के बारे में पूछताछ कर रही है। बता दें कि इससे पहले छोटेलाल हत्याकांड का एक आरोपी बिट्टू चौधरी को पुलिस ने पांच दिन पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सात जुलाई को मनिहार खेड़ा मार्ग स्थित एक प्रॉपर्टी कार्यालय पर बैठे पूर्व प्रधान छोटे लाल को दो बाइक सवार युवकों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। तफ्तीश के बाद एक आरोपी बिट्टू चौधरी को मय पिस्टल के पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि बिट्टू चौधरी के साथ मेरठ निवासी गोपी भी हत्याकांड में शामिल था। पुलिस गोपी को दबोचने के लिये निरंतर जुटी हुई थी। पुलिस गोपी की तलाश में यूपी के कई इलाकों में लगातार दबिशें दे रही थी।
सूत्र बताते हैं कि पुलिस टीम ने गत रात्रि में भी गोपी के पुश्तैनी घर और रिश्तेदारों में भी ताबड़तोड़ दबिश दी, जिस कारण गोपी टूट गया और उसने सरेंडर करने का मन बना लिया। बृहस्पतिवार को गोपी नाटकीय ढंग से कोतवाली पहुंचा जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर दिया।
उधर इस मामले में एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले और एएसपी पंकज भट्ट ने बताया कि हत्याकांड के बाद से ही गोपी फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही थी। फिलहाल पुलिस गोपी से पूछताछ कर रही है।
दो दिन तक यूएस नगर जिले में ही रहा गोपी
पूर्व प्रधान की हत्या के बाद गोपी दो दिन तक ऊधमसिंह नगर जिले में ही छिपा रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह बाजपुर, काशीपुर और जसपुर के इर्द-गिर्द ही ठिकाने बदलता रहा।
जैसे ही उसे पता चला कि छोटे लाल हत्याकांड अब ज्यादा गरमा गया है तो उसने यूपी के सीमावर्ती जिलों में शरण ले ली और वह अपने नेटवर्क के जरिए यूएस नगर पुलिस की और परिजनों के घरों पर पुलिस दबिश की जानकारी लेता रहा।
अपने मोबाइल का नहीं किया इस्तेमाल
वारदात को अंजाम देने के बाद से ही गोपी ने अपने मोबाइल का कोई इस्तेमाल नहीं किया। गोपी जानता था कि अगर उसने अपना मोबाइल का उपयोग किया तो पुलिस का शिकंजा, उसकी गर्दन तक पहुंच जाएगा। इसलिए वह अपने नेटवर्क के साथियों से खुद ही जाकर मिलता रहा।
पुलिस सूत्रों का तो यह भी कहना है कि इस बीच गोपी पर कुछ सफेदपोश लोगों की भी छत्रछाया बनी रही, लेकिन हत्याकांड में जब दिग्गज राजनीति के लोग सड़क आ गए तो फिर उसके पास सरेंडर करने के लिए और कोई चारा नहीं रह गया।