अपनी मांगों को लेकर पांच दिन से एएलसी दफ्तर पर भूख हड़ताल पर बैठे प्रिकाल कंपनी के ठेका श्रमिकों को अनशन से उठाने पहुंचे एसडीएम, पुलिस और पीएसी को श्रमिकों के जबदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। पीएसी ने बलपूर्वक उठाया तो उनमें जमकर हाथापाई हुई, जिससे दर्जनों श्रमिक और पीएसी की पांच महिला जवान जख्मी हो गईं।
अनशनकारियों को उठाकर उपचार के लिए एसटीएच भेजा गया और दर्जनों श्रमिकों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले गए। श्रमिकों ने एसडीएम और पुलिस पर तानाशाह रवैया अपनाने का आरोप लगाया है, जबकि एसडीएम चंद्र सिंह इमलाल का कहना है कि उन्होंने किसी भी श्रमिक के साथ हाथापाई नहीं की, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने को कहा गया, जिस पर श्रमिक मारपीट पर उतारू हो गए।
सिडकुल की प्रिकाल कंपनी से ठेकेदार द्वारा निकाले गए करीब 150 ठेका श्रमिकों के पक्ष में अन्य श्रमिक भी आंदोलन पर हैं। वे पुनर्नियुक्ति और न्यूनतम साढ़े दस हजार रुपये मानदेय की मांग कर रहे हैं। एक सितंबर से उपश्रमायुक्त दफ्तर पर नेहा, पूजा, पूनम, आनंद, ललित, रूपा और मनमोहन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
रविवार को डाक्टर ने अनशनकारियों की जांच कर प्रशासन को उनके गिरते स्वास्थ्य की रिपोर्ट सौंपी। इस पर हरकत में आया प्रशासन सोमवार को अनशन समाप्त कराने पहुंचा। एसडीएम चंद्र सिंह इमलाल, सीओ और सिडकुल चौकी प्रभारी एमपी सिंह ने जब श्रमिकों से अनशन खत्म करने की बात कही तो अनशनकारियों ने इससे इंकार कर दिया। जिसके बाद एसडीएम ने वहां मौजूद पुलिस कर्मियों को जबरन उन्हें उठाने के आदेश दे डाले।
श्रमिकों द्वारा विरोध करने पर दो पीएसी भी मौके पर बुला ली गई और पीएसी के जवान श्रमिकों को जबरन गाड़ी में ठूंसने लगे। इस दौरान उनके जमकर हाथापाई हुई, जिससे पीएसी की महिला जवान किरन शर्मा, लीला नेगी, एकता चौधरी, सीमा और वसुंधरा के साथ ही श्रमिक उर्मिला, सोनी, माधुरी, चांदनी, कविता बिष्ट, रागिनी, सुमन दीपा, हेमा किरन सहित कई श्रमिक चोटिल हो गईं।
उसके बाद पुलिस तीस श्रमिकों को गाड़ी में डालकर जिला अस्पताल पहुंची जहां पांच अनशनकारियों को उतारने के बाद अन्य को पुलिस लाइन ले गए। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इधर, अनशनकारी नेहा, पूजा, पूनम, आनंद और ललित का मेडिकल कराने के बाद उन्हें उपचार के लिए हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल भेज दिया गया। इस दौरान कई और श्रमिक घटनास्थल पर पहुंचे जिन्हें रोकने के लिए वहां भारी पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया। देर शाम फिर तीन श्रमिक अनशन पर बैठ गए।
बिना डाक्टर और एंबुलेंस के अनशनकारियों को लेने पहुंची पुलिस
सोमवार सुबह जब पुलिस अनशनकारियों को लेने श्रम विभाग के परिसर पहुंची तो ना उनके साथ कोई डाक्टर थे और न ही एंबुलेंस, श्रमिकों की मानें तो जब उन्होंने पुलिस की गाड़ी में बैठकर अस्पताल जाने से मना किया तो पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें उठाया, जिससे भगदड़ मची और कई लोग घायल हो गये।
फटे कपड़े और टूटा सामान बयां कर रहा बर्बरता
अनशनकारियों को हटाने के दौरान हुई मारपीट से भले ही पुलिस इंकार कर रही है, लेकिन इस दौरान फटे युवतियों के कपड़े, टूटे मोबाइल और बिखरा सामान पूरी तरह से पुलिस की बर्बरता को बयां कर रहा था। पुलिस ने सबसे पहले श्रमिकों के मोबाइल कब्जे में ले लिए, फिर घसीटते हुए उन्हें गाड़ी के अंदर ठूंस दिया, जिससे कई युवतियों के कपड़े फटने से वह चोटिल हो गये। आरोप है कि वहां रखा श्रमिकों का राशन भी पुलिस ने बर्बाद कर दिया।
18 घंटे बाद हुई अनशनकारियों के स्वास्थ्य की चिंता
मांगों के लिए अनशन पर बैठे प्रिकाल ठेका श्रमिकों के स्वास्थ की चिंता पुलिस और जिला प्रशासन को 18 घंटे बाद हुई। रविवार को डा. तनुजा सिंहा ने अनशनकारियों की जांच कर स्पष्ट कर दिया था कि उनकी हालत गंभीर है, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की कोशिश नहीं की। फिर सोमवार सुबह ऐसा क्या हुआ कि अचानक पुलिस अनशनकारियों को उठाने पहुंच गई।
कहां गये दो अनशनकारी
सोमवार सुबह जब पुलिस अनशनकारियों को लेने श्रम विभाग के परिसर पहुंची तो उसके बाद से दो अनशनकारी कहां लापता हो गये इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। श्रमिकों की मानें तो घटना के समय उनके दो साथी रूपा और मनमोहन को पुलिस ने बुरी तरह मारा और उसके बाद उन्हें ले गई। देर शाम तक उनका कुछ पता नहीं चला। पुलिस की मानें तो ये दो अनशनकारी कहां गये उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है।
खरी-खोटी सुनाकर नेताओं को भी किया वापस
पुलिस और अनशनकारियों के बीच हुई मारपीट के बाद जब कांग्रेसी नेता अजय तिवारी श्रमिकों के प्रति संवेदना जताने घटना स्थल पर पहुंचे तो श्रमिकों ने घटना को मुख्यमंत्री की साजिश बताकर नारेबाजी करते हुए उन्हें घेर लिया जिससे उन्हें बिना बातचीत के ही वापस लौटना पड़ा। हालांकि एएलसी कार्यालय के बाद कांग्रेस नेता अजय तिवारी ने एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले से मोबाइल फोन पर बात की। इसके बाद उन्होंनो यह मामला मुख्यमंत्री के सज्ञान में भी डाला।
गाड़ी में भी की गई श्रमिकों से मारपीट
अनशनकारियों को जिला अस्पताल में पहुंचाने के बाद पुलिस 23 श्रमिकों को पुलिस लाइन ले गई, जहां उन्हें नजरबंद कर दिया गया। श्रमिकों का आरोप था कि पुलिस लाइन लाने के दौरान भी उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। जिससे करीब 17 लोग चोटिल हो गये।