एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में की गई मनी लांड्रिंग की परतें ईडी की जांच में उधड़ने लगी हैं। अब तक एसआईटी की जांच में जहां अधिकारियों और बिचौलियों की ओर से काश्तकारों से 40 प्रतिशत कमीशन लेने की पुष्टि हुई थी वहीं, अब जसपुर के एक काश्तकार ने एक पीसीएस अधिकारी को नौ करोड़ रुपये कमीशन देने का खुलासा किया है। किसान को उसकी जमीन पर कुल 17 करोड़ का मुआवजा मिला था। कमीशन लेने वाला पीसीएस अधिकारी अभी जेल में बंद है।
एनएच-74 में भू-अधिग्रहण के नाम पर सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों ने खुद भी काश्तकारों से करोड़ों रुपये कमीशन के रूप में लिए। खुद को बचाने के लिए रकम को ठिकाने भी लगा दिया। सरकार के इसी नुकसान की भरपाई के लिए अब ईडी ने ऐसे अधिकारियों और बिचौलियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी की जांच में जसपुर के एक काश्तकार ने इस बात का खुलासा किया है कि एनएच-74 निर्माण के लिए उसकी जमीन का अधिग्रहण एक तत्कालीन पीसीएस अधिकारी की ओर से कराया गया था।
इसके एवज में उसे 17 करोड़ का मुआवजा मिला। मुआवजे की इसी रकम में से उसने अधिकारी को नौ करोड़ रुपये का कमीशन दिया। बता दें कि उक्त पीसीएस अधिकारी एसआईटी की कार्रवाई के बाद अभी जेल में बंद है। फिलहाल ईडी अधिकारी की ओर से ली गई इस मोटी रकम को ठिकाने लगाने में शामिल लोगों की जांच पड़ताल कर रही है।
हल्द्वानी से भी जुड़े हैं मनी लांड्रिंग के तार
एनएच-74 भूमि मुआवजे में हुई मनी लांड्रिंग के तार हल्द्वानी से भी जुड़े हैं। मुआवजे की रकम को हल्द्वानी में खपाए जाने की जानकारी पर ईडी ने शनिवार को हल्द्वानी में भी अपनी जांच पड़ताल की। सूत्रों के अनुसार हल्द्वानी के एक बिल्डर की ओर से मुआवजे के करोड़ों की रकम को ठिकाने लगाया गया है।
जसपुर और काशीपुर में भी खपाई गई रकम
एनएच-74 में किसानों की ओर से ली गई अतिरिक्त मुआवजे की रकम और अधिकारियों द्वारा लिए गए कमीशन को हल्द्वानी के साथ ही काशीपुर और जसपुर में भी खपाया गया है। सूत्रों के अनुसार ईडी के सामने ऐसे कुछ मामले आने पर ईडी ने काशीपुर और जसपुर में भी अपनी जांच शुरू कर दी है। काश्तकारों के खाते भी ईडी की ओर से खंगाले जा रहे हैं।