एनएच-74 भूमि मुआवजे घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी जांच के अंतिम चरण में है। एसआईटी की ओर से आर्बिट्रेशन के मामलों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अब आर्बिट्रेटर की ओर से बरती गईं अनियमितताओं के मामले में शासन का फैसला निर्णायक मोड़ लेगा।
एसआईटी की जांच में कुछ मामले ऐसे आए थे, जिनमें आर्बिट्रेटर ने एसएलओ से पारित गलत अभिनिर्णय आदेशों को सही दर्शाया और इसके आधार पर करोड़ों का मुआवजा बांट दिया गया।
भूमि मुआवजा घोटाले में तत्कालीन अफसरों और काश्तकारों की जांच के बाद एसआईटी के सामने आर्बिट्रेशन में ले जाए गए कुछ मामले संदिग्ध मिले थे। इनकी छानबीन के लिए एसआईटी ने एनएचएआई के अधिकारियों से आर्बिट्रेशन के मामलों की सूची तलब कर इस बात की जानकारी जुटाई कि किन कारणों से मामलों को आर्बिट्रेशन में ले जाने की जरूरत पड़ी।
आर्बिट्रेशन में आर्बिट्रेटर के फैसले के बाद क्या किसी मामले को जिला जज या हाईकोर्ट में ले जाया गया। आर्बिट्रेशन में जाने वाले कुछ भूस्वामियों के बयान भी एसआईटी ने दर्ज किए थे।
सूत्रों के अनुसार जांच में खुलासा हुआ कि बतौर आर्बिट्रेटर दो तत्कालीन अफसरों ने गलत अभिनिर्णय आदेशों को सही दर्शाकर घोटाले को नजरअंदाज किया था।
दोनों अफसरों के खिलाफ आर्बिट्रेशन न्यायालय में करीब एक दर्जन वाद दायर हुए थे। कुछ में एसएलओ के अभिनिर्णय आदेश को आर्बिट्रेटर द्वारा सही बताया गया, लेकिन जिला जज की कोर्ट ने आर्बिट्रेटर के निर्णय को निरस्त कर दिया। इसमें कुछ मामले कृषि भूमि को अकृषि और कुछ मामले सरकारी भूमि को निजी दर्शाने के थे।
पूरे मामले में अनियमितता के साक्ष्य मिलने के बाद एसआईटी ने उक्त अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एक जांच रिपोर्ट शासन को भेजी है। हालांकि अफसर अभी मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
विधिक राय लेने में जुटा शासन
रुद्रपुर। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी की ओर से आर्बिट्रेटर के खिलाफ भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले शासन भी इसमें विधिक राय लेने में जुटा है। ताकि मामले में किसी तरह का गलत निर्णय लेने से बचा जा सके।
3-डी होने के बाद भी अफसरों ने किया खेल
रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में अधिग्रहण के लिए 3-ए से लेकर 3-जी तक प्रक्रिया होती है। और 3-डी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहीत की जाती है। लेकिन, तत्कालीन अफसरों ने भूमि का 3-डी और फिर 3-जी होने के बाद भी कागजों में हेराफेरी कर लाखों के मुआवजे को करोड़ों में दर्शा दिया।