काशीपुर में विशेष शिक्षा/पुनर्वास केंद्र में बच्चों को सिखाते शिक्षक।
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इसे प्रशासन की लापरवाही न कहे तो और क्या कहें...। दिव्यांग बच्चों के लिए आया करीब साढ़े तीन लाख रुपये का सामान अधिकारियों की अनदेखी के चलते खराब हो गया। दिव्यांगों के लिए खोले गए केंद्र में उन्हें पढ़ाने के लिए पाठ्य सामग्री ही नहीं है, जिस कारण इन मासूमों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
बाजपुर रोड स्थित बीआरसी कार्यालय में वर्ष 2012 में दिव्यांगों के लिए केंद्र की स्थापना की गई थी। सरकार ने बच्चों की शिक्षा के लिए केंद्र को करीब साढ़े तीन लाख रुपये का सामान दिया था। सरकार की ओर से हर साल प्रत्येक दिव्यांग बच्चे के लिए तीन हजार रुपये मिलते थे। मार्च 2014 में बजट के अभाव केंद्र को बंद कर दिया गया। इससे यहां पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। केंद्र के बंद होने के बाद बीआरसी अधिकारियों ने वहां मौजूद सामान को बंद कर दिया।
पिछले साल नवंबर में अनमोल फाउंडेशन संस्था के माध्यम से विशेष शिक्षा/पुनर्वास केंद्र फिर से खोला गया और सतीश कुमार चौहान को विशेष शिक्षक नियुक्त किया गया। अधिकारियों ने जब सामान निकाला तो कमरे में रखे-रखे माइक, कंप्यूटर सिस्टम, हियरिंग एड सहित लाखों का सामान खराब हो गया। इससे एक बार फिर बच्चों को पढ़ाने समझाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र के खुलने के तीन माह बाद भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दिव्यांगों की सुध नहीं ली।
बजट न मिलने पर पूर्व में खोला केंद्र बंद कर दिया गया था। हाल ही में शुरू हुए नए केंद्र में पुराना सामान ही रखा है, लेकिन कमरे में पड़े-पड़े 3.5 लाख रुपये का यह सामान खराब हो गया। मानसिक रूप से कमजोर दिव्यांगों को पढ़ाने में दिक्कतें हो रही हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से आसानी से पढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने केंद्र की कोई सुध नहीं ली है।
- सतीश कुमार चौहान, पुनर्वास केंद्र काशीपुर, विशेष शिक्षक एवं एनजीओ के सचिव।
मामला कई साल पुराना है। यह उपशिक्षाधिकारी के अंतर्गत आता है। शुक्रवार को रुद्रपुर में बैठक में जाना है, वहां से लौटकर आने के बाद कुछ बता पाऊंगा।
आरएस नेगी, खंड शिक्षाधिकारी, काशीपुर
केंद्र एनजीओ के माध्यम से खुला है। डीएम के निर्देश पर इस केंद्र को कार्यालय में एक कक्ष उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा इस केंद्र से कोई लेना देना नहीं है। जो भी कार्य होगा वह एनजीओ ही कराएगी।
वंदना रौतेला, उपशिक्षा अधिकारी, काशीपुर