एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में भूमि अधिग्रहण के नाम पर की गई करोड़ों की मनी लांड्रिंग की जांच के लिए देहरादून से पहुंची प्रर्वतन निदेशालय की टीम ने एसआईटी से महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं। अक्तूबर 2017 में ईडी को एसआईटी की ओर से मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट मिलने के बाद जनवरी 2018 में ईडी ने मामले की जांच शुुरू की थी।
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में करीब आठ माह का समय बीतने के बाद एसआईटी अब जांच के अंतिम दौर में है। जांच में काशीपुर, जसपुर, गदरपुर, किच्छा और सितारगंज तहसील में मनी लांड्रिंग के कई मामले सामने आए। इनमें अधिकारियों, काश्तकारों और भूमि की 143 कराने वाले बिचौलिये ने एनएच निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की थी।
जांच शुुरू होने के बाद बीते वर्ष अक्तूबर में पहली बार मनी लांड्रिंग के कुछ मामले पकड़ में आने पर एसआईटी ने ईडी को प्रथम सूचना रिपोर्ट भेजी थी। इस पर तीन जनवरी को ईडी के अधिकारियों ने रुद्रपुर पहुंचकर एसआईटी से मामलों की जानकारी लेने के साथ ही एसएलओ कार्यालय एवं तहसील में भी जांच पड़ताल की थी। जांच आगे बढ़ने के साथ ही एसआईटी को कुछ प्रॉपर्टी डीलर और बिल्डर भी मनी लांड्रिंग में शामिल मिले।
मनी लांड्रिंग की एक चेन एसआईटी के हाथ लगी। चूंकि मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जाती है, इसलिए एक बार फिर ईडी ने अपनी जांच के दायरे को बढ़ाया है। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को देहरादून से पहुंचे ईडी के अधिकारियों ने एसआईटी से जेल भेजे गए आरोपियों के बारे में जानकारी के साथ ही कुछ लोगों की संपत्ति का ब्योरा भी जुटाया। माना जा रहा है कि जल्द ही ईडी मनी लांड्रिंग में शामिल अधिकारियों, बिल्डरों और काश्तकारों की संपत्ति जांच भी कर सकती है।