सात वर्षीय मासूम दीपक की हत्या उसके पड़ोसी ने ही की थी। हत्याकांड का खुसाला करते हुए एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि पड़ोसी ने ही मासूम की हत्याकर शव को प्लास्टिक के कट्टे में बंद कर गेहूं के खेत में फेंक दिया था। हत्यारोपी ने उसके बेटे से दीपक की कहासुनी होने पर उसकी हत्या कर दी थी। बता दें कि पुलिस को इस हत्याकांड का खुलासा करने में छह माह लग गए।
एसएसपी ने शुक्रवार को थाने में मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 25 फरवरी को प्रतापपुर नंबर चार बंगाली कॉलोनी निवासी लाल सिंह विश्वास का पुत्र दीपक विश्वास (7) घर से खेलने के लिए निकला था। उसी रात करीब 8:30 बजे घर के पीछे गेहूं के खेत में उसका शव कट्टे बंद मिला था। तब से पुलिस जांच में जुटी थी। एसएसपी ने बताया कि दीपक के पड़ोस में रहने वाले सुशील विश्वास उर्फ शिकारी के मानसिक रूप से बीमार बेटे समीर विश्वास (45) ने दीपक की हत्या कर उसके हाथ-पैर और मुंह पर टेप लगाकर शव को ठिकाने लगा दिया था।
एसएसपी ने बताया कि समीर के पिता सुशील शिकारी ने दीपक के माता-पिता को बताया था कि उसके बेटे समीर ने ही दीपक की हत्या की है। इसके बाद पुलिस ने करीब आठ बार समीर से पूछताछ की। आठवीं बार की पूछताछ में पुलिस ने कई सुबूतों के साथ जब पूछताछ की तो समीर टूट गया और अपना जुर्म कुबूल लिया। हत्या की घटना के दिन समीर की पत्नी सुचित्रा विश्वास की चप्पल शव से कुछ दूरी पर मिली थी। घटना से ध्यान भटकाने के लिए आरोपी ने गांव में बाघ आने का भ्रम फैलाया था ताकि शक की सुई उस तक नहीं घूमे।
‘मेरे बेटे को दीपक ने मारा था, मैंने मारा तो मर गया’
नानकमत्ता। हत्यारोपी समीर विश्वास ने मीडिया के सामने कहा कि दीपक उसके नौ वर्ष के बेटे सुमित से आए दिन मारपीट करता था। घटना के दिन भी दीपक ने सुमित को मारा था। सुमित रोता हुआ घर आया और दीपक की शिकायत की। इस पर उसने मैदान में खेल रहे दीपक को बुलाया और गेहूं के खेत में ले गया। इसके बाद उसने दीपक की गर्दन के पिछले हिस्से को पकड़कर जमीन पर उसका मुंह रगड़ दिया। दम घुटने से उसकी मौत हो गई। इसके बाद मुंह और हाथ-पैर को टेप से बांधकर शव को खेत में फेंक दिया।
मेरे बच्चे के हत्यारे को मिले फांसी
नानकमत्ता। थाना परिसर में खुलासे के दौरान जैसे ही हत्यारोपी ने जुर्म कबूला दीपक की मां कोनिका विश्वास फफक पड़ीं और रुंधे गले से अपने बच्चे के हत्यारे के लिए फांसी की सजा की मांग करने लगी। कोनिका का कहना था कि यदि उसके बच्चे से गलती हुई थी तो समीर उसे या उसके पति को सजा दे देता पर बच्चे की जान क्यों ले ली। ब्यूरो
तीन शादी कीं, एक की हत्या की, एक ने छोड़ दिया
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपी समीर विश्वास अब तक तीन शादियां कर चुका है। पहली पत्नी बसंती की वर्ष 1999 में सरिया से गला दबाकर हत्या कर दी थी। तब उसने आत्महत्या दर्शाने के लिए उसका शव फंदे पर लटका दिया था। इस मामले में थाने में मुकदमा भी दर्ज है और आरोपी 11 माह तक जेल में रहा था। इसके बाद वर्ष 2003-04 में शक्तिफार्म की दीप्ति से शादी की। दीप्ति समीर के अभद्र व्यवहार को देखकर उसे छोड़ कर चली गई। दीप्ति ने भी दीपक की हत्या में समीर के शामिल होने का अंदेशा जताया था। एसएसपी ने बताया कि हत्यारोपी को आईपीसी की धारा 302 व 201 के तहत कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। एसएसपी ने खुलासा करने वाली टीम को 25 सौ रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है। वहां एसपी देवेंद्र पींचा, कमलेश उपाध्याय, खटीमा सीओ कमला बिष्ट आदि थे।
खुलासे में लगी थी छह टीमें
नानकमत्ता। हत्याकांड के दिन से करीब दो माह तक एसएसपी ने थाना पुलिस, एसओजी, डॉग स्क्वायड एवं फोरेंसिक एक्सपर्ट समेत छह टीमों को खुलासे में लगाया था। टीमों ने उत्तराखंड के अलावा हिमाचल, यूपी, दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न इलाकों के संदिग्धों से पूछताछ की। पुलिस ने जादूगरों, तंत्र क्रिया, रंजिश एवं अनैतिक संबंधों के बिंदुओं पर जांच की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। अंत में थानाध्यक्ष दौलत राम वर्मा के नेतृत्व में एसआई योगेश कुमार, पूर्व थानाध्यक्ष अशोक कुमार, कांस्टेबल रघुनाथ गोस्वामी, महेश जोशी, रमेश जोशी और विनोद जोशी खुलासे में लगे रहे।
हत्याकांड का खुलासा तो हो गया पर झोल ही झोल
नानकमत्ता। दीपक हत्याकांड के खुलासे में झोल ही झोल दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने जिस हत्यारोपी को जेल भेजा है, वह मानसिक रूप से बीमार है। जिस टेप से मासूम के हाथ-पैर और मुंह को बांधा गया वह हरियाणा-पंजाब सीमा पर स्थित नालागढ़ की एक कंपनी में बनता है। आखिर वह टेप यहां कैसे पहुंचा और टेप हत्यारे समीर विश्वास के पास आया तो कहां से। इसके अलावा, हत्यारोपी की पत्नी की चप्पल खेत में घटना के दौरान कैसे मिली। आरोपी यदि मानसिक रूप से बीमार है तो षड्यंत्र कैसे रच लिया।
ये सब सवाल हत्याकांड की कहानी में अनसुलझे हैं। और तो और दो दिन पहले ही गांव के ही एक युवक ने फेसबुक पर घटना का खुलासा करते हुए मानसिक रूप से बीमार हत्यारोपी को पकड़ने को झूठा करार दिया। इसके अलावा जब पड़ोसी ही हत्यारा था तो पुलिस को उस तक पहुंचने में छह माह का समय क्यों लग गया। इन सब सवाल के जवाब भी पुलिस को देने होंगे। इधर, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते का कहना है कि उक्त सवालों पर भी जांच की जा रही है। हत्याकांड में कोई और भी शामिल हो सकता है। हो सकता है कि हत्यारोपी अन्य अभियुक्तों को बचाना चाह रहा हो। जांच के बाद ही आगे कुछ जा सकेगा। ब्यूरो