शहर में नजूल भूमि पर पर बसे लोगों को हटाने के निर्देश से नजूल भूमि पर वर्षों से काबिज लोगों में हड़कंप मच गया है। नजूल भूमि पर बसे लोग हाईकोर्ट के निर्णय से हैरान हैं।
संजय नगर निवासी तपन विश्वास का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश से नजूल बस्ती पर वर्षों से बसे गरीब लोग परेशानी में आ गये हैं, उन्हें उजाड़ा गया तो वह सड़कों पर आ जायेंगे। तपन ने कहा इस मामले में प्रदेश सरकार पर ही अब उम्मीद टिकी है, वहीं उन्हें बचाने के लिए कुछ कर सकती है।
पूर्व पालिकाध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुभाष चतुर्वेदी कहते हैं कि प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर तथ्यों से अवगत कराना चाहिए, जिससे यहां की जनता को राहत मिल सके। उन्होंने कहा शहर में 80 फीसदी लोग नजूल भूमि पर ही बसे हैं, उन्हें उजाड़ा गया तो पूरा शहर तबाह हो जायेगा। चतुर्वेदी ने कहा 1977 में एक शासनादेश जारी किया गया था जिसमें एक रुपए टोकन मनी पर 16 गुणा 30 के भूखंड आवंटित करने की योजना थी, कुछ लोगों ने आवंटित भी कराये, लेकिन सरकार की ये नीति सही ढंग से लागू नहीं हो पाई, जिससे सैकड़ों लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
इंदिरा कालोनी निवासी सुंदर कुमार वाधवा का कहना है कि पैसे के अभाव और सर्किल रेट अधिक होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय लोग नजूल भूखंडों को फ्रीहोल्ड नहीं करा पाये हैं, अगर सरकार सर्किल रेट कम करती तो नजूल भूमि पर बसे सैकड़ों लोगों को अब तक कब्जा मिल चुका होता, जिससे आज यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा सरकार को इस मामले में गंभीर रूख अपनाना चाहिए।
इंदिरा बंगाली कालोनी निवासी विरेंद्र सिंह भी हाईकोर्ट के फैसले से परेशान हैं। उनका कहना है कि चार वर्ष पूर्व उन्होंने भूखंड को फ्रीहोल्ड कराने का प्रयास किया था, लेकिन सर्किल रेट ज्यादा होने की वजह से नहीं करा पाये। पांच लाख से भी अधिक रकम फ्रीहोल्ड कराने में लग रही थी, जिसे देना उनके लिए संभव नहीं था, जिसके चलते आज भी वह नजूल भूखंड पर ही रहने को मजबूर हैं।
भदईपुरा निवासी गजेंद्र सिंह राघव कहते हैं शहर की विभिन्न कालोनियों में खेती की जमीनें थी, बीस वर्ष पहले उनको पांच वर्ष तक खेती के लिए भूमि नगर पालिका की ओर से आवंटित की गई थी, पांच वर्ष के बाद प्रभावशाली लोगों ने इन जमीनों पर कब्जा कर लिया और कालोनियां काट दी। तमाम लोगों को बिना फ्रीहोल्ड कराये जमीनें बेच दी,अब इन लोगों को उजाड़ने की कोशिश नाइंसाफी है।
दूधिया मंदिर के महंत स्वामी शिवानंद महाराज भी हाईकोर्ट के फैसले से हैरान हैं। उन्होंने कहा कि तमाम प्रभावशाली लोगों ने सरकारी जमीनें कब्जा रखी हैं, उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए न कि गरीबों के खिलाफ। शिवानंद जी ने कहा अधिकांश गरीब ही इस आदेश की चपेट में आ रहे हैं।
वहीं रंपुरा निवासी राजेश कुमार का कहना है कि फ्रीहोल्ड का शुल्क अधिक होने से अधिकांश गरीब जनता अपने प्लाटों को फ्रीहोल्ड नहीं करा पाई है, ऐसे में उन्हें उजाड़ा जाना न्याय संगत नहीं है। सरकार को इस मामले में गंभीरता से पैरवी करके गरीब जनता को राहत दिलानी चाहिए।