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120 फुट ऊंचे मोबाइल टॉवर से लगा दी छलांग

Sun, 10 Dec 2017 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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ऐचता में टावर से कूदता विक्षिप्त युवक। - फोटो : अमर उजाला
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डैमपार के एक गांव में हृदयविदारक हादसा हुआ। मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। परिजनों के समझाने पर उतर तो आया, लेकिन कुछ देर बाद गांव के ही दूसरे टावर पर जा चढ़ा। सूचना पर पुलिस पहुंची, लेकिन तब तक युवक ने छलांग लगा दी। गंभीर अवस्था में उसे खटीमा अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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नानकसागर डैम के पार बसे ग्राम ऐचता निवासी जगदीश सिंह राणा (28) पुत्र बलवंत सिंह राणा शनिवार को सुबह 7:30 बजे घर के अहाते में लगे वोडाफोन के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। परिजनों के समझाने के बाद वह नीचे उतर आया। डेढ़ घंटे बाद करीब नौ बजे वह परिजनों को चकमा देकर घर के पास ही लगे करीब 120 फुट ऊंचे आइडिया के मोबाइल टावर पर जा चढ़ा। इससे गांव में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों का हुजूम मौके पर उमड़ पड़ा। सूचना मिलने पर एसडीएम सितारगंज विनोद कुमार और थाने के एसआई ललित चौधरी पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन उससे पहले ही जगदीश ने हर-हर गंगे बोलते हुए छलांग लगा दी। मुंह के बल टावर के पास खेत में गिरने से वह अचेत हो गया।

पुलिसकर्मी उसे अपने वाहन में लादकर खटीमा नागरिक चिकित्सालय के लिए रवाना हो गए। ग्रामीणों ने आपातकालीन वाहन 108 को भी घटना की सूचना दे दी थी। रास्ते में 108 वाहन मिला तो पुलिस ने जगदीश को उसमें शिफ्ट कर दिया। नागरिक चिकित्सालय पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।  
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युवक की मौत से पिता बलवंत सिंह, मां कलावती, छोटे भाई शिवकुमार, प्रदीप सिंह, कमल सिंह और बहन ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों व ग्रामीणों ने बताया कि जगदीश पिछले छह साल से मानसिक बीमारी से ग्रस्त था, जिसका उपचार भी कराया गया था। पिता बलवंत सिंह के पास मात्र एक एकड़ जमीन है और मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। रविवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।

टावरों पर नहीं कोई चौकीदार तैनात
सितारगंज। मोबाइल कंपनियों द्वारा टावरों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए कर्मचारी और चौकीदार तैनात किए जाते हैं, लेकिन ऐचता गांव के 120-120 फुट ऊंचे दोनों टावरों पर चौकीदार तैनात ही नहीं हैं। अगर, चौकीदार होते तो शायद विक्षिप्त युवक टावर पर चढ़ने की हिम्मत न जुटा पाता और चौकीदार उसे रोक लेता और उसकी जान न जाती। 
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