संपूर्णानंद शिविर जेल और केंद्रीय कारागार में अस्पताल और चिकित्सकों के नहीं होने के कारण बीमार कैदियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत बिगड़ने पर कैदियों को एसटीएच हल्द्वानी या फिर दिल्ली तक ले जाना पड़ता है। इसके अलावा
मरीजों के इलाज में जेल प्रशासन के हाथ भी खाली है। हालात यह है कि जेल प्रशासन पर वर्ष 2015 से अब तक कैदियों के इलाज का करीब 22 लाख का कर्ज हो गया है। जेल को मिलने वाली सरकारी मदद भी कर्ज के इस मर्ज के लिए पर्याप्त नहीं है।
राज्य गठन से पहले संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में करीब 25 शैय्याओं का अस्पताल था। इसमें स्थायी डॉक्टर के साथ ही पर्याप्त स्टाफ था। उत्तराखंड बनने के बाद जर्जर हो चुके खुली जेल के अस्पताल को बंद कर दिया गया। वर्ष 2003 में यहां 512 कैदियों की क्षमता वाला केंद्रीय कारागार स्थापित किया गया। 2010 में बाढ़ के दौरान खुली जेल के कैदियों को केंद्रीय कारागार में शिफ्ट कर दिया। वर्तमान में यहां विभिन्न जिलों से लाए 682 कैदी सजा काट रहे हैं। जेल में क्षमता से अधिक कैदी तो शिफ्ट कर दिए, लेकिन न तो जेल का अस्पताल बनाया गया और न ही अप्रैल 2016 से खाली चिकित्साधिकारी के पद पर नियुक्ति की गई। मई 2017 में आईजी ने जेल को एंबुलेंस दी थी।
जेल में लकवा, टीबी, हृदय रोग और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे करीब 150 कैदियों को इलाज के लिए सीएचसी सितारगंज, एसटीएच हल्द्वानी और दिल्ली तक के अस्पतालों में ले जाया जाता है। जेल प्रशासन के अनुसार हर साल कैदियों के इलाज पर करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च होते हैं। संबंधित मद में सरकार की ओर से मिलने वाली रकम कर्ज उतारने के लिए पर्याप्त नहीं है। बताया कि वर्तमान में जेल पर कैदियों के इलाज का करीब 22 लाख रुपये बकाया है। इसमें से 10 लाख एसटीएच हल्द्वानी और 12 लाख मेडिकल स्टोरों के हैं।
कारागार में अस्पताल बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है। स्थायी चिकित्साधिकारी की नियुक्ति के लिए सीएमओ को कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जेल पर इलाज और दवा के खर्च का 22 लाख का कर्ज हो गया है। शासन से सिर्फ पांच लाख रुपये मिले थे। कर्ज अदायगी के लिए मुख्यालय को मांग पत्र भेजेंगे। -
टीडी जोशी, जेल अधीक्षक, संपूर्णानंद केंद्रीय कारागार
सीएमओ से अप्रैल तक सेंट्रल जेल में डाक्टर की तैनाती की मांग की जाएगी। सीएमओ स्तर से नियुक्ति न होने पर सीधे शासन से तैनाती कराएंगे। जेल के चिकित्साधिकारी का उनके कार्यकाल से पहले स्थानांतरण हुआ था। जेल में अस्पताल निर्माण का मुद्दा भी शासन में रखेंगे।
- सौरभ बहुगुणा, विधायक, सितारगंज