फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेस वसूलने में श्रम विभाग का रवैया सुस्त

Sun, 17 Sep 2017 12:53 AM IST
चंदन बंगारी /अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
विज्ञापन
बरामद की गई ओल्ड करेंसी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
श्रम विभाग दस लाख रुपये से अधिक की लागत का भवन बनाने वालों से सेस (उपकर) वसूलने में उदासीन है। आलम यह है कि छह महीने में एक भी जिलेभर में एक भी भवन स्वामी को सेस चुकाने संबंधी नोटिस नहीं भेजा जा सका है। बड़ी संख्या में हो रहे भवन निर्माण पर विभाग की नजर नहीं पड़ सकी है। इस कारण तमाम श्रमिकों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। 
विज्ञापन


भारत सरकार ने 1996 में भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम पारित किया। इसके तहत एक फीसदी सेस लेने का नियम है। यह दस लाख रुपये से अधिक लागत का भवन बनाने पर लागू होता है। सेस भवन स्वामी को चुकाना होता है। यह भवन के साथ ही बड़े ठेकेदारों, उद्योगों पर भी लागू होता है। श्रम विभाग की ओर से जारी होने वाले नोटिस में मकान की कुल लागत, सेस की रकम का ब्यौरा भी दिया जाता है। सेस से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल श्रमिकों के हितों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं के लिए होता है। 

रुद्रपुर उपश्रमायुक्त कार्यालय के पास जिले के साथ ही चंपावत का भी जिम्मा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 से विभाग विभिन्न भवन और फैक्ट्री स्वामियों से सेस के रूप में साढ़े पांच करोड़ रुपये वसूल चुका है। अब भी जिलेभर में बड़ी तादाद में भवनों का निर्माण हो रहा है। कई जगहों पर उद्योग भी लग रहे हैं, लेकिन विभाग अप्रैल से अभी तक जिले में सेस संबंधी एक भी भवन स्वामी को नोटिस नहीं भेज सका है। यह हाल तब है जब जिले की तहसीलों में श्रम अधिकारी तैनात हैं।  
विज्ञापन


श्रम विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष में एक कंपनी को एक करोड़ रुपये सेस चुकाने का नोटिस भेजा था लेकिन राशि को ज्यादा बताकर भवन स्वामी कोर्ट की शरण में चला गया। उपश्रमायुक्त ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद भवन स्वामी ने 35 लाख रुपये सेस की राशि चुकाई थी। इधर कुछ समय पूर्व ही पिछले वित्तीय वर्ष में भेजे गए नोटिस के बाद सिडकुल की एक कंपनी ने साढ़े 14 लाख, एक कंपनी ने डेढ़ लाख रुपये सेस जमा किया था। अभी वित्तीय वर्ष की शुरुआत ही हुई है। अब सेस संबंधी नोटिस जारी किए जाएंगे। दस लाख रुपये से अधिक की लागत के भवन पर एक फीसदी सेस लगता है। जो भवन स्वामी सेस नहीं चुकाते हैं, उनकी आरसी जारी की जाती है। सेस की राशि चुकाने के लिए छह महीने का समय दिया जाता है। श्रम निरीक्षक मौके पर जाकर भवन की जांच करते हैं। अगर वह सेस के दायरे में आता है तो भवन स्वामी को नोटिस जारी होता है।  
विज्ञापन

- उमेश चौहान, उपश्रमायुक्त, रुद्रपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें