बरेली के चैनपुर में चैन से जी रहे सुरेश प्रसन्न सिंह को करीब छह माह पूर्व पता चला कि उनकी ‘मौत’ 18 साल पहले वर्ष 2000 में हो चुकी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बेटे की ‘मौत’ के बाद उनकी 15 एकड़ जमीन को पांच लोगों ने अपने नाम भी करवा लिया है। छटपटाते हुए यह ‘मुर्दा’ सोमवार को यहां पहुंचा और बताया कि वह जिंदा हैं। पीड़ित ने डीएम को पत्र सौंपकर और पुलिस को तहरीर देकर न्याय की मांग की है।
गांव बेनीपुर सादात थाना बिथरी चैनपुर जिला बरेली निवासी सुरेश प्रसन्न सिंह उर्फ सुरेश कुंवर सिंह (71) पुत्र स्व. राम स्वरूप सिंह ने सोमवार को गदरपुर थाने में तहरीर देकर कहा कि उनके पिता स्व. राम स्वरूप सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। तत्कालीन यूपी सरकार ने उन्हें राजस्व ग्राम मुकंदपुर में 15 एकड़ कृषि भूमि आवंटित की थी।
पिता की मृत्यु के बाद विरासतन यह भूमि उनके और उनके बड़े भाई महेश प्रसन्न सिंह के नाम दर्ज हो गई। महेश प्रसन्न सिंह का 17 मार्च 2009 को निधन हो चुका है। परिवार के बरेली में ही रहने की वजह उन्होंने जमीन को गांव के कुछ लोगों को ठेके पर दिया था। कुछ महीनों पहले जब सुरेश प्रसन्न सिंह ने किसी मामले में जमीन से संबंधित प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कीं तो पता चला कि ग्राम मुकंदपुर तहसील गदरपुर के रहने वाले पांच लोगों ने मिलीभगत कर उनके बड़े भाई महेश प्रसन्न को 22 अक्तूबर 1999 और उन्हें पांच जनवरी 2000 को मरा दर्शा दिया है।
आरोप है कि इसके बाद तहसील कर्मियों से सांठगांठ कर झूठे बयान दर्ज करवाकर उक्त पांचों ने जमीन अपने नाम करवा ली। यही नहीं, आरोपियों ने इन फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों को न्यायालय तहसीलदार गदरपुर में नामांतरण आदेश पारित करवाकर खतौनी में दर्ज करा लिया। घटना का पता चलने पर उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई।
dइन छह माह की अवधि में उन्होंने सभी दस्तावेज जुटाए और करीब चार-पांच दिन पहले सुरेश प्रसन्न ने यहां पहुंचकर मामले से डीएम को अवगत कराते हुए न्याय की मांग की। डीएम ने मामले की जांच एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल को जांच सौंपी है। इधर, थानाध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच उपनिरीक्षक ललित बिष्ट को सौंपी गई है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।