नैनीताल से लौटते समय हादसे के शिकार हुए काशीपुर के राइस मिलर, उनकी पत्नी व गुजराती दंपति के शवों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट में चार चिताएं एक साथ जलने से वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। शोक स्वरूप बृहस्पतिवार को मंडी परिसर की सभी आढ़तें बंद रहीं।
मोहल्ला विजय नगर नई बस्ती निवासी राइस मिलर तेज प्रकाश अरोड़ा अपनी पत्नी रश्मि अरोड़ा, बेटे सागर, जीजा नाडियार (गुजरात) निवासी डॉ. शांति स्वरूप मदान व बहन किसनू सतारिया व अन्य परिजनों के साथ अर्टिगा और क्रेस्टा कारों से नैनीताल घूमने गए थे। लौटते समय बैलगढ़ (रामनगर) के पास कुत्ते को बचाने के प्रयास में अर्टिगा कार सिंचाई विभाग की नहर में गिर गई। इस कार में दो दंपति सवार थे। जबकि तेज प्रकाश का पुत्र सागर क्रेस्टा कार में था। सागर ने अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता और बुआ-फूफा को नहर में गिरते देखा। सागर ने नहर में कूद लगा दी।
क्रेस्टा कार में सवार लोगों समेत आसपास के लोगों ने अर्टिगा सवारों को बाहर निकालने का प्रयास किया। मां-बाप को संकट में देख सागर ने कार की एक साइड का शीशा तोड़ दिया। वह करीब एक घंटे तक घायलों को कार से बाहर निकालने की जद्दोजहद में जूझता रहा। बमुश्किल कार सवार सभी छह लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। नैनीताल के डीएम के आदेश पर बुधवार देर रात मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया। रात करीब दो बजे चारों शव तेज प्रकाश अरोड़ा के नवनिर्मित आवास रुद्रा विला पहुंचे तो परिजनों व संबंधियों के विलाप से वातावरण गमगीन हो गया। बृहस्पतिवार देर शाम स्वर्ग वाहनों से शवों को श्मशान घाट ले जाया गया। अरोड़ा दंपति को उनके इकलौते पुत्र सागर व गुजराती दंपति को उनके पुत्र डॉ. उत्कर्ष ने मुखाग्नि दी।
15 घंटों तक मां-बाप की मौत से अंजान रही बेटी
काशीपुर। राइस मिलर तेजप्रकाश अरोड़ा की बेटी को अपने माता-पिता की मौत की खबर पंद्रह घंटे बाद मिली। अरोड़ा दंपति की बेटी सागरिका नोएडा से बीबीए कर रही है। नए घर के गृह प्रवेश और मम्मी पापा की शादी की सिलवर जुबली मनाने के लिए वह छुट्टी लेकर आई हुई थी। बुधवार को वह नोएडा स्थित अपने संस्थान एमिटी पहुंच गई। हादसा होने पर बेटी के दूर होने के कारण किसी ने उसे खबर नहीं दी। बृहस्पतिवार की शाम उसे काशीपुर लाया गया। माता पिता के शव देखकर वह बेसुध हो गई।
पुत्री के इंतजार में रोकना पड़ा अंतिम संस्कार
गुजराती दंपति की इकलौती पुत्री निक्की अपने दिवंगत माता-पिता के अंतिम दर्शन श्मशान घाट पर ही कर सकी। निक्की का परिवार कोच्चि (केरल) में रहता है। उसे बृहस्पतिवार की सुबह हादसे की जानकारी दी गई। तीन फ्लाइट बदलने के बाद शाम करीब चार बजे निक्की दिल्ली पहुंची। भाई डॉ. उत्कर्ष परिजनों के साथ पहले ही पहुंच चुके थे। निक्की के आने की सूचना पर परिजन रुद्रा विला में ही उसकी प्रतीक्षा करते रहे। देर शाम चारों शव श्मशान घाट ले जाए गए। यहां अरोड़ा दंपति का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि डॉ. शांति स्वरूप व उनकी पत्नी किसनू के शवों की अंत्येष्टि उनकी पुत्री के श्मशान घाट पहुंचने के बाद ही की गई।
शोक व्यक्त करने वालों का लगा रहा तांता
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, मनोज जोशी, संदीप सहगल, मुकेश मेहरोत्रा, भाजपा नेता राम मेहरोत्रा, प्रवीण सेठी, राजीव अरोड़ा, गुरविंदर सिंह चंडोक, रघुनाथ अरोड़ा, जितेंद्र बोहरा आदि तमाम लोगों ने मृतकों के आवास पर पहुंचकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मिलनसार व परिश्रमी व्यापारी के रूप में जाने जाते थे तेजप्रकाश
राइस मिलर तेज प्रकाश अरोड़ा की पहचान एक मिलनसार और परिश्रमी व्यापारी के रूप में थी। व्यवसाय में एक बार भारी घाटा होने के बाद वह अपने अथक प्रयासों से फिर उबर गए। उनकी बड़ी रकम दूसरे प्रदेशों के व्यापारियों द्वारा दबा ली गई थी। मंडी के आढ़ती बताते हैं कि वह 16 से 18 घंटों तक काम करते थे। उन्होंने अपनी आढ़त के अलावा तीन और राइस मिलें ठेके पर ली हुई थी। आर्थिक स्थिति सुदृृढ़ होने पर उन्होंने मानपुर रोड विजयनगर कॉलोनी में भव्य विला बनाया था। 27 जनवरी को गृहप्रवेश पर माता की चौकी थी। शादी की सिल्वर जुबली के अगले दिन उन्होंने दुनियां को अलविदा कह दिया। दोनों पति-पत्नी में अटूट प्रेम था। मजाक में भी दोनों साथ मरने की बात करते थे।