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बच्चे की मौत से आहत होकर की गई थी जसपुर में डॉक्टर हत्या

Sat, 23 Apr 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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हत्‍या - फोटो : Amar Ujala
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बीमार बच्चे को नहीं देखने और उसकी मौत होने से आहत हुए व्यक्ति ने अपने साले के साथ मिलकर दिनदहाड़े डॉ. एसके सिंह की गोली मार कर हत्या की थी। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए दोनों हत्यारोपियों को बिजनौर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल तमंचे और बिना नंबर की अपाचे बाइक को भी बरामद कर लिया है। घटना के खुलासे पर डीजीपी ने 20 हजार, डीआईजी ने 5 हजार, एसएसपी ने ढाई हजार, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने 11 हजार और देवभूमि मीडिया क्लब ने 15 सौ रुपये ईनाम देने की घोषणा की। 
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बता दें कि 20 अप्रैल को बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे। तभी एक बदमाश ने उन्हें ओपीडी में ही तमंचे से गोली मार दी थी। इलाज के लिए ले जाने के दौरान डॉ. एसके सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद आईएमए और सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी थीं। 

डीआईजी और एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर घटना के खुलासे को 10 सदस्यीय टीम का गठन किया था। शुक्रवार को घटना का खुलासा करते हुए एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले ने बताया कि डॉ. एसके सिंह की हत्या के मामले में दो लोगों को बिजनौर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में हत्यारोपी ने अपना नाम मानिक राठी उर्फ मिंटू निवासी ग्राम प्रवणपुर थाना कोतवाली नजीबाबाद जिला बिजनौर (यूपी) और दूसरे ने शिवम त्यागी निवासी अभयराजपुर थाना अफजलगढ़ जिला बिजनौर (यूपी) बताया। 
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हत्यारोपी मानिक ने बताया कि उसका बेटा भव्वी राठी जो 3 मार्च 2016 को किलकारी नर्सिंग होम जसपुर में पैदा हुआ था, उसका स्वास्थ्य 17 अप्रैल को अचानक खराब हो गया। उसे लगातार उल्टी-दस्त हो रहे थे। उसके इलाज के लिए वह उसे डॉ. एसके सिंह के पास लाया था। डॉ. सिंह ने उसके बच्चे को ड्रिप व इंजेक्शन लगाकर दवा देकर घर भेज दिया। 

18 अप्रैल को वह दोबारा डॉ. सिंह के पास आया तो डॉक्टर ने बच्चे को इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया। रात को अचानक फिर बच्चे की तबियत खराब हुई तो वह डॉक्टर के पास आया। उसने बच्चे की तबियत बताने का प्रयास किया, लेकिन डॉ. सिंह घर से बाहार नहीं निकले। उसने कई बार प्रार्थना की पर उसके बच्चे को डॉक्टर ने नहीं देखा। 

वह बच्चे को अन्य अस्पताल भी ले गया, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं मिले। जिसके चलते 19 अप्रैल की सुबह उसके बच्चे की मौत हो गई। मानिक ने बताया कि बच्चे की मौत से वह टूट गया और उसने उसी दिन डॉक्टर की हत्या करने की ठान ली। 20 अप्रैल को अपने साले शिवम के साथ मिलकर उसने डॉ. एसके सिंह की अस्पताल में गोली मारकर हत्या कर दी। 


‘बॉस आज भी तो छुट्टी है’ पर पुलिस को हुआ संदेह 
डॉ. सिंह को गोली मारने के दौरान बदमाश द्वारा ‘बॉस आज भी तो छुट्टी का दिन है आज कैसे मरीज देख रहे हैं’ से पुलिस को संदेह हुआ कि हो सकता है कि किसी सिरफिरे व्यक्ति द्वारा अपने बच्चे की मौत का बदला लेने के लिए डॉ. सिंह की हत्या की गई होगी। पुलिस को यह भी पता चला कि डॉ. सिंह अस्पताल के अलावा अपने घर पर भी मरीजों को देखते थे। 

इस पर पुलिस ने ओपीडी में मरीजों के अतिरिक्त घर पर देखे जाने वाले ऐसे मरीजों का रिकार्ड खंगाला जिसमें एक-दो दिन पहले किसी बच्चे की मृत्यु हुई हो। रिकार्ड से पुलिस को पता चला कि 17 अप्रैल को डॉ. सिंह द्वारा मानिक राठी के पुत्र को देखा गया था। यह भी पता चला कि 19 अप्रैल को उसके बेटे की मृत्यु हो गई। 

पुलिस ने मानिक राठी की तलाश की तो पता चला कि मानिक राठी एडवोकेट अब्दुल माजिद मोहल्ला पट्टी चौहान गुजरातियान जसपुर के घर में किराए पर रहता है। जो अपनी पत्नी मोनी के साथ घर से फरार है। लोगों के आधार पर बनाए गए स्केच और मोबाइल सेल साइड डाटा के मिलान से पुलिस को यकीन हो गया कि मानिक ने ही बदला लेने की नियत से डॉ. एसके सिंह की हत्या की है। 

बच्चे की मौत के बाद फेसबुक में लिखा लास्ट डे इन दिस वर्ल्ड
हत्यारोपी मानिक राठी बच्चे की मौत से बेहद ही टूट चुका था। करीब एक वर्ष पूर्व उसकी शादी अभयराजपुर थाना अफजलगढ़ जिला बिजनौर (यूपी) निवासी मोनी त्यागी से मंदिर में हुई थी। परिवार में बच्चा आने पर वह बहुत खुश थे। क्योंकि मानिक के परिवार में कोई भाई-बहन नहीं था। इसलिए बेटे की मौत से वह अंदर से टूट गया। 

उसे लगा कि यदि डॉ. एसके सिंह उसके बच्चे को देख लेते तो वह आज जिंदा होता। मानिक ने बच्चे की मौत के बाद उसे अपने ससुराल ग्राम वहराजपुर में जाकर दफना दिया। उसी रात मानिक ने करीब 10:30 बजे फेसबुक में अपने मृत बच्चे का फोटो अपलोड कर स्टेटस अपडेट किया और लिखा ‘लास्ट-डे इन दिस वर्ल्ड’ हमारा साथ हमेशा के लिए छोड़ गया। 

मानिक राठी पर दर्ज है हत्या के दो मुकदमे 
एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले ने बताया कि मानिक राठी एक अपराधी किस्म का व्यक्ति है। उसके खिलाफ बिजनौर में हत्या के दो मुकदमे सहित आधा दर्जन से अधिक अभियोग पंजीकृत है। जिसका आपराधिक इतिहास मंगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अपने बच्चे की मौत का बदला लेने के लिए ही मानिक राठी ने अपने साले शिवम के साथ मिलकर डॉ. एसके सिंह की हत्या की। 

पुलिस को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत 
डॉ. सिंह की हत्या का खुलासा करना पुलिस के लिए बेहद ही मुश्किल चुनौती थी। एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले व एएसपी कमलेश उपाध्याय ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए दिन-रात पूरी ताकत घटना के खुलासे को झोंक दी। दो दिन लगातार कड़ी मेहनत करने के बाद पुलिस ने दोनो हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया। 

डॉ. सिंह हत्याकांड खोलने में पुलिस को आई कई दिक्कतें
डॉ. एसके सिंह की हत्या का कारण स्पष्ट नहीं होने से पुलिस को उसे खोलने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एएसपी कमलेश उपाध्याय के नेतृत्व में बनाई गई टीम ने घटना स्थल के आसपास के समस्त सीसीटीवी फुटेज चेक किए और प्रत्यक्षदर्शियों से अभियुक्तों के स्केच बनवाए गए। 

एसओजी ने साइड डाटा उठाकर एनालिसिस किया। जिसमें कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर निकले, जिसके आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। जब पुलिस ने डॉ. एसके सिंह के पारिवारिक परिवेश व उनके स्टाफ व उनकी रंजिश के बारे में गहनता से छानबीन की तो कोई भी रंजिश प्रकाश में नहीं आई। 

खुलासा करने वाली टीम में यह रहे शामिल 
घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में एएसपी कमलेश उपाध्याय, सीओ जीसी टम्टा, कोतवाल जसपुर डीआर आर्या, थाना अध्यक्ष कुंडा रमेश तनवार, एसएसआई जसपुर अशोक कुमार, एसएसआई बाजपुर अरुण कुमार, एसआई नासिर हुसैन, महेश चंद्र जोशी, कुंडेश्वरी चौकी इंचार्ज धीरेंद्र कुमार, एसआई रेवती नंदन, चिरंजीत सिंह, प्रकाश भगत, किसन, कुलदीप सिंह, आसिफ, खीम सिंह, मोहम्मद शमीम, कपिल, अरविंद कुमार, मनोहर सिंह, संजीव कुमार, कृष्ण चंद्र, कैलाश परिहार आदि शामिल थे। 

मानिक को नहीं है हत्या करने का मलाल
हत्यारोपी मानिक राठी पर दो हत्याओं और पांच हत्याओं के प्रयास के मुकदमे नजीबाबाद जिला बिजनौर कोतवाली में दर्ज हैं। उसकी फेसबुक फ्रेंडशिप की लिस्ट में आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं। हत्यारोपी मानिक नजीबाबाद बिजनौर की पुलिस से बचने के लिए अब्दुल मजीद पुत्र मो. इब्राहिम निवासी मो. पट्टी चौहान के यहां किराए पर रह रहा था। 

हत्या के बाद वह पत्नी को लेकर फरार हो गया था। पुलिस को बिना सूचना दिए किराएदार रखने पर मकान मालिक पर पांच हजार रूपए जुर्माना डाला है। मानिक ने बताया कि 20 अप्रैल की सुबह को उसने अस्पताल पहुंच कर रेकी की। उसे पता चला कि अस्पताल की छुट्टी है, लेकिन डॉक्टर सिंह आए और बच्चों को देखने लगे। अगर वह अस्पताल में नहीं मिलते तो वह उनके घर जाकर उन्हें मारता। उसे डॉक्टर की हत्या का कोई मलाल नहीं है। 
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