एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी की ओर से आर्बिट्रेशन के मामलों के दस्तावेज लेने से खफा अतिरिक्त ऑर्बिट्रेटर ने बॉर्डर लाइन (अधिकार सीमा) तय होने पर ही कोर्ट में सुनवाई की बात कही है। इससे करीब एक दर्जन वादों में होने वाले अंतिम निर्णय भी लटक गए हैं। हालांकि, अतिरिक्त ऑर्बिट्रेटर की नियुक्ति के बाद एक भी वाद में निर्णय नहीं हो सका है। सूत्रों के मुताबिक शासन ने इस संबंध में निर्णय होने तक एसआईटी जांच से इतर वाले मामलों में सुनवाई करने की बात अतिरिक्त आर्बिट्रेटर से कही है।
दरअसल, एसआईटी ने तत्कालीन डीएम और आर्बिट्रेटर पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव के ऑर्बिट्रेशन के फैसलों पर उंगली उठाते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इस मामले में दोनों अधिकारियों को शुक्रवार को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है।
मामले में सीएम ने कहा है कि नैसर्गिक न्याय के तहत दोनों अफसर अपना पक्ष जांच एजेंसी के समक्ष रख सकते हैं। संदेहप्रद आर्बिट्रेशन के निर्णयों को लेकर एसआईटी की ओर से दस्तावेज लेने और दखल से दो महीने पहले तैनात हुए अतिरिक्त आर्बिट्रेटर आरसी पाठक ने तीन जुलाई को कोर्ट में लंबित वादों की सुनवाई बंद कर दी थी।
उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्यायिक प्रक्रिया में एसआईटी के दखल पर आपत्ति जताते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। बताया जा रहा है कि कोर्ट स्थगित करने के दौरान करीब एक दर्जन वाद ऐसे थे, जिनका निस्तारण अंतिम चरण में था। ऐसे में अब ये वाद भी लटक गए हैं। माना जा रहा है कि अतिरिक्त आर्बिट्रेटर यह नहीं चाहते कि उनके दिए निर्णय पर आने वाले समय में उंगली उठाई जाए।
अतिरिक्त आर्बिट्रेटर आरसी पाठक ने कहा कि वह शुरुआत से ही कहते आए हैं कि आर्बिट्रेशन न्यायिक प्रक्रिया की श्रेणी में आता है, ऐसे में एसआईटी का दखल देना गलत है। कहा कि कुछ वादों के निर्णय होने वाले थे, जो रोक दिए गए हैं। उन्होंने शासन को लिखे पत्र में इस मामले पर बार्डर लाइन तय करने को कहा है। बार्डर लाइन तय होने के बाद ही कोर्ट में सुनवाई हो सकेगी।