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कुटरा में चरस, चीकाघाट में बिक रही स्मैक

Wed, 13 Sep 2017 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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उड़ता तराई - फोटो : अमर उजाला
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युवा पीढ़ी की नशीले पदार्थों तक पहुंच आसान हो गई है, जिससे वे नशे के आदी होते जा रहे हैं। चर्चित अड्डों पर धड़ल्ले से चरस और स्मैक की बिक्री हो रही है। नशे के धंधेबाज कैरियरों की मदद से युवाओं तक नशे का सामान पहुंचा रहे हैं। चीकाघाट में स्मैक 300 रुपये बिट तो कुटरा में चरस 700 रुपये तोला बिक रही है।
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नशे की जकड़ में तराई के दस से 30 साल के युवा फंसते जा रह हैं। छोटे बच्चे व्हाइटनर, चिपकाने वाला द्रव्य का इस्तेमाल कर रहे हैं। छात्र और युवाओं को स्मैक और चरस आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इसका इस्तेमाल कर वे अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। स्मैक का नया ठिकाना सितारगंज के चीकाघाट पुल के पास है। 

इसी तरह खटीमा के कुटरा गांव से नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चरस सप्लाई होती है। नगर में वार्ड संख्या चार, पांच, रेलवे स्टेशन रोड पर पीपल के पास, डिग्री कालेज रोड, वन निगम के पास, पालीप्लैक्स कारखाने के आगे जंगल में स्मैक व चरस दोनों ही तरह के नशे मिल जाएंगे। उच्च मध्यवर्गीय युवाओं में स्मैक का नशा खूब चल रहा है। गौटिया, इस्लामनगर चरस की सबसे बड़ी बिक्री का क्षेत्र है। यहां चरस लेने लोग दूर-दराज से पहुंचते हैं।  
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जहां-जहां से नशे का सामान बेचने की सूचनाएं मिल रही हैं, वहां पुलिस लगातार कार्यवाही कर रही है। उन्होंने जनता से पुलिस को नशे का सामान बेचने वालों और जगहों की सूचना देने की अपील की है, जिससे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
- डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी  
समाज के ताने-बाने में बदलाव आया है। समाज का नैतिक पतन हुआ है। परिवार का दबाव बच्चे पर अच्छे नंबर लाने का है। ऐसे दबाव में असफल होने पर जब बच्चा टूटता है तो वह नशाखोरी की ओर बढ़ता है। इसके अलावा मित्र मंडली का असर भी होता है। नशेड़ियों में गंभीर बीमारियां होती हैं।
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- एएम रतूड़ी, वरिष्ठ चिकित्सक
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