गदरपुर की शिक्षिका रुचि अग्रवाल के मामले में लापरवाही बरतने के मामले में डीएम ने सख्ती शुरू कर दी है। बेलगाम हो चुके शिक्षा विभाग के अफसरों पर कार्रवाई तय है। डीएम ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जिले की मुख्य शिक्षा अधिकारी नीता तिवारी, डीईओ केके वार्ष्णेय और गदरपुर के पटल सहायक खजान सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
जिलाधिकारी डा. पंकज कुमार पांडेय ने अपर मुख्य सचिव एस राजू को भेजे गए संस्तुति पत्र में कहा है कि गदरपुर में तैनात शिक्षिका रुचि अग्रवाल का चिकित्सकीय अवकाश और मातृत्व अवकाश का प्रकरण चल रहा था। इस मामले की जांच सीईओ नीता तिवारी से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि शिक्षिका रुचि अग्रवाल 14 जुलाई से अगस्त तक अवकाश पर थीं, लेकिन समक्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नहीं दी। इस कारण अध्यापिका का वेतन भुगतान नहीं किया जा सका। इसके बाद सहायक अध्यापिका अग्रवाल मातृत्व अवकाश पर भी रहीं। मातृत्व अवकाश का वेतन भुगतान करने के लिए जिले के सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया गया, लेकिन शिक्षिका का वेतन नहीं दिया गया। खंड शिक्षाधिकारी ने अवगत कराया कि कार्य की अधिकता के कारण उनके सामने यह प्रकरण नहीं लाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि खंड शिक्षा कार्यालय और पटल सहायक ने अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरती। इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिक्षिका अवकाश पर रहीं, लेकिन पटल सहायक ने अपने कर्तव्य के प्रति घोर उदासीनता बरती। गदरपुर की उप शिक्षा अधिकारी ने भी आठ जून को पत्र भेजकर बताया था कि शासन के आदेश के अनुसार पटल सहायक खजान सिंह से शिक्षिका की पत्रावली उपलब्ध कराने को कहा गया। उन्होंने पत्रावली नहीं दी। इसके अलावा उन्होंने उप शिक्षा अधिकारी से भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया। यही नहीं गदरपुर क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षक और अन्य लोग खजान सिंह की शिकायत करते रहे हैं। इस कारण खजान सिंह की भूमिका संदिग्ध लग रही है। साथ ही खजान सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया था। लेकिन उन्होंने पटल सहायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इस कारण जिले के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। डीएम ने सीईओ, डीईओ बेसिक पर विभागीय कार्रवाई और पटल सहायक का तबादला कर विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की है।