संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) से फरार उम्रकैदी दो सगे भाई सिडकुल नाले पर बीएसएनएल टावर के पास देखे गए। जब तक जेल की टीम वहां पहुंची दोनों गायब हो गए। रात भर जेल और पुलिस की टीम ने जंगल में सघन कांबिंग की।
लेकिन, फरार कैदी हाथ नहीं आए। वहीं, कैथुलिया गांव में पुलिस का पहरा दूसरे दिन भी लगा रहा। पुलिस ने फरार कैदियों के माता-पिता से पूछताछ भी की।
शनिवार की सुबह करीब आठ बजे प्रधान बंदी रक्षक पीतांबर दत्त भट्ट की अभिरक्षा में 26 कैदी लालरखास के शहतूत प्लाट पर धान की रोपाई करने गए थे।
जहां से नानकमत्ता के टुकड़ी गांव के रहने वाले आजीवन सजायाफ्ता कैदी हंसराज उर्फ हंसा व हरवंश उर्फ वंशा प्रधान बंदी रक्षक को चकमा देकर फरार हो गए थे।
तब से जेल व पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार कांबिंग कर रही हैं। जेलर जयंत पांगती ने बताया कि शनिवार शाम को शहतूत प्लाट पर सुरक्षा कर्मियों के साथ जेल के बंदी निगरानी कर रहे थे।
इसी दौरान कुछ बंदियों ने सिडकुल नाले के समीप बने बीएसएनएल टावर के पास दोनों कैदियों को देखा। उनकी सूचना पर वह तत्काल पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। लेकिन, तब तक दोनों गायब हो गए।
जिसके बाद रात भर पास के जंगल में कांबिंग की गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने बताया कि फरार कैदियों की तलाश में सघन कांबिंग व कैदियों के घर पर दबिशें जारी हैं।
पुलिस क्षेत्राधिकारी पीएस पांगती ने बताया कि कैदियों के मां-बाप से पूछताछ की जा रही है। उनके घर व गांव में सख्त पहरा लगाया गया है। खुफिया विभाग की टीमें भी उनकी तलाश में लगाई गई हैं।
संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) और अधूरी केंद्रीय कारागार की सुरक्षा को लेकर पूर्व में कई बार कारागार विभाग को आगाह किया गया। अमर उजाला ने गत 24 अप्रैल के अंक में ‘सेंट्रल जेल अधूरी, सुरक्षा भी नहीं पूरी’ शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी।
लेकिन, न तो जेल प्रशासन ने इस पर गौर किया और न ही शासन सुरक्षा कर्मियों की भर्ती को लेकर गंभीर है। इसका खामियाजा जेल में तैनात अफसर व सुरक्षा कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है।
19 मार्च 1960 को स्थापित संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) दो हजार बंदियों की क्षमता वाली जेल थी। खुली जेल में जेलर के दो पद, डिप्टी जेलर के 24, प्रधान बंदी रक्षक के 13, बंदी रक्षकों 113 पद सृजित हैं।
जिनमें से दो डिप्टी जेलर, नौ प्रधान बंदीरक्षक व 17 बंदी रक्षक ही तैनात हैं। इसके अलावा सेंट्रल जेल में सृजित रिजर्व बंदी रक्षक के आठ व बंदी रक्षक के 39 पद रिक्त पड़े हैं।
नौ प्रधान बंदी रक्षकों और 17 बंदी रक्षकों पर सेंट्रल जेल के 275 कैदियों व खुली जेल के 143 बंदियों की सुरक्षा का जिम्मा है। जेल में ड्यूटी करने वाले इन सुरक्षा कर्मियों पर तलवार लटकी रहती है।
आलम ये हो गया है कि सेंट्रल जेल के कैदी व खुली जेल के बंदियों की सुरक्षा को लेकर इन प्रधान बंदी रक्षकों व बंदी रक्षकों की रात की नींद भी उड़ी रहती है।
अमर उजाला ने इस मामले को गत 24 अप्रैल को प्रमुखता के साथ उठाया। इसके अलावा वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य द्वारा भी समय-समय पर सुरक्षा कर्मियों की कमी से विभाग व शासन को अवगत कराया जाता है।
लेकिन, कारागार विभाग व शासन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। जिसका खामियाजा जेल के सुरक्षा कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है।