एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में सात माह बाद एसआईटी ने सितारगंज के एक और काश्तकार बलदेव सिंह पुत्र प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया है। एसआईटी जांच में काश्तकार की ओर से बैक डेट से अपनी भूमि का 143 कराकर 1.30 करोड़ से अधिक का मुआवजा लेने की पुष्टि हुई है।
सात माह पहले काशीपुर के दो काश्तकारों ने अदालत में सरेंडर किया था। माना जा रहा है कि एसआईटी जल्द ही कुछ और किसानों की गिरफ्तारी कर सकती है। उधर, एसआईटी ने बुधवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे नैनीताल में जिला जज व विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम नरेंद्र दत्त की कोर्ट में किसान को पेश किया जहां से उसे 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक पांच पीसीएस अधिकारियों सहित 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी एसआईटी ने बुधवार को सितारगंज के चीकाघाट निवासी काश्तकार बलदेव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। एसआईटी जांच में बलदेव सिंह की ओर से चीकाघाट में स्थित 0.1260 हेक्टेयर भूमि का बैक डेट में 143 कराकर एक करोड़ 30 लाख 97 हजार सात सौ रुपये मुआवजा लेने की पुष्टि हुई है। एसआईटी के विवेचक/ एएसपी स्वतंत्र कुमार ने बताया कि नोटिस जारी करने के बाद बुधवार को सितारगंज थाना पुलिस की मदद से एसआईटी ने काश्तकार बलदेव सिंह को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
अब तक 47 किसानों को चिन्हित कर चुकी है एसआईटी
रुद्रपुर। पूरे घोटाले में एसआईटी ने 47 किसानों को चिह्नित किया है। इनमें से तत्कालीन अफसरों को कमीशन देकर मुआवजा लेने वाले 18 किसानों के खिलाफ एसआईटी ने बीते वर्ष गैर जमानती वारंट जारी किया था। सितंबर 2018 में दो काश्तकारों को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था, जबकि काशीपुर के दो किसानों ने नैनीताल कोर्ट में सरेंडर किया था।
इसके बाद एसआईटी की जांच धीमी पड़ गई थी। माना जा रहा था कि इस दौरान एसआईटी का पूरा ध्यान आईएएस अधिकारी डॉ पंकज पांडेय के खिलाफ डीओपीटी से अभियोजन आदेश लेने पर था, जिससे एसआईटी किसानों की गिरफ्तारी नहीं कर सकी। सप्ताह भर पूर्व शासन से आईएसस डॉ. पंकज पांडेय की बहाली के आदेश मिलने के बाद एसआईटी ने किसानों की गिरफ्तारी की रणनीति तैयार कर संबंधित थानों की पुलिस को 55 सीआरपीसी का नोटिस भेजा।
कुछ और गिरफ्तारी होने पर लगेगी पांचवीं चार्जशीट
रुद्रपुर। एनएच घोटाले में अब तक 26 लोगों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी कोर्ट में चार आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसमें से एसआईटी की ओर से पहला आरोप पत्र 31 जनवरी 2018 को, दूसरा 11 अप्रैल 2018 को, तीसरा 22 सितंबर 2018 को और चौथा आरोप पत्र 24 नवंबर 2018 को कोर्ट में दाखिल किया गया। काश्तकार बलदेव सिंह के साथ ही कुछ और किसानों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी पांचवां आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल करेगी।
इन तहसीलों के काश्तकारों की होनी है गिरफ्तारी
रुद्रपुर। एनएच घोटाले में एनएच-74 निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के नाम पर जिले के जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, रुद्रपुर, कुंडा और आईटीआई में किसानों ने तत्कालीन अफसरों की मदद से बैक डेट में अपनी भूमि का 143 कर करोड़ों का मुआवजा डकारा था। इसमें कुछ बिचौलिये और बिल्डर भी शामिल रहे। फिलहाल मुआवजा लेने वाले शेष किसानों की भी एसआईटी को इन्हीं तहसीलों से गिरफ्तारी करनी है। इसके लिए एसआईटी द्वारा तहसील में स्थित थाना प्रभारियों को नोटिस भेजा गया है।
अब तक 2.51 करोड़ की हुई रिकवरी
रुद्रपुर। एनएच घोटाला उजागर होने के बाद करोड़ों का मुआवजा लेने वाले अधिकांश किसान भूमिगत हो गए, जिसमें से पांच किसानों के विदेश में होने की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ एसआईटी ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। कुछ किसानों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए मुआवजा वापस करने की गुहार लगाई तो एसआईटी ने कोर्ट में आवेदन किया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर एसबीआई में सरकारी खाता खोला गया, जिसमें अब तक 19 किसानों द्वारा दो करोड़ 51 लाख रुपये की रकम जमा की गई है। चूंकि किसानों को एसआईटी द्वारा आरोपी बनाया गया है जिससे माना जा रहा है कि जल्द ही एसआईटी उक्त किसानों को भी गिरफ्तार कर सकती है।
एक थारू की जमीन का कब्जेदार दिखाकर दिया था बलदेव को मुआवजा
नैनीताल। एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में एक और खुलासा हुआ है। तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया और एसएलओ डीपी सिंह ने किसान बलदेव सिंह को एक थारू की जमीन का कब्जेदार दिखाकर उसे एक करोड़ 30 लाख 97 हजार सात सौ रुपये का मुआवजा बांटा था। जमीन को बैक डेट में आकृषक दिखाया गया था। बलदेव सिंह को अदालत में पेश करने के दौैरान डीजीसी सुशील कुमार शर्मा ने इस बात का खुलासा किया।
पेशी के दौरान डीजीसी सुशील कुुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि एनएच-74 निर्माण में किसान ने अपनी जमीन को तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया से बैक डेट में 143 करवा कर धोखाधड़ी से लाभ लिया। जबकि यह जमीन दस्तावेजों में चीकाघाट निवासी मुरली सिंह पुत्र भंडारी के नाम पर दर्ज थी।
मुरली थारू जनजाति का था, जिसकी मौत 40 साल पहले हो चुकी है। प्रकरण में तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह ने भी मिलीभगत की और किसान को जमीन का कब्जेदार दिखाकर एक करोड़ 30 लाख 97 हजार सात सौ रुपये का मुआवजा बांट दिया गया। आरोपित बलदेव सिंह के मुताबिक डीपी सिंह ने उससे कहा था कि अगर उसे मुआवजे के पैसे चाहिए तो सेल्फ के दो ब्लैंक चेक हस्ताक्षर करके उसे देने होंगे। इसके बाद किसान ने डीपी सिंह को दोनों चेक दे दिए। इसके बाद किसान के खाते में रुपये डाले गए। डीपी सिंह ने एक्सिस बैंक से दोनों चेकों से 72 लाख 40 हजार रुपये निकाल लिए।