यूको बैंक शाखा के स्ट्रांग रूम के डबल लॉक में रखे 21 लाख से अधिक के गहने चोरी होने के मामले में शाखा प्रबंधक ने पुलिस को तहरीर सौंपी है। बैंक अधिकारियों ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है।
शाखा प्रबंध विवेक अरुण ने कहा कि बैंक शाखा में स्वर्ण आभूषण लोन के 12 खाते चल रहे हैं। आभूषणों के पैकेट स्ट्रांग रूम में डबल लॉक में बंद थे, जिनकी कीमत 21 लाख 28 हजार 600 रुपये थी। जिन पर 14.79 लाख रुपये का लोन दिया गया था। 11 सितंबर को एक ऋण खाताधारी अपना लोन चुकता कर अपने आभूषण लेने शाखा में आया था।
शाखा प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और प्रधान खजांची ने स्ट्रांग रूम में रखी तिजोरी खोली तो स्वर्ण आभूषणों के सभी पैकेट गायब थे। सूचना पर अंचल कार्यालय से मुख्य प्रबंधक अमित सिन्हा और नवदीप कुमार ने जांच की। जांच के बाद एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी मानकर निलंबित कर दिया गया है। एसआई देवेंद्र राजपूत ने बताया कि जांच जारी है, उसके बाद ही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। ब्यूरो
डबल लॉक तिजोरी से गहने चोरी में नप सकते हैं बैंक अधिकारी
दिनेश कौशिक
जसपुर। यूको बैंक शाखा के स्ट्रांग रूम के डबल लॉक की तिजोरी से 21 लाख से अधिक के गहने चोरी होने के मामले में शाखा प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, प्रधान खजांची की भी गर्दन फंस सकती है। बैंक ने मामले की जांच जोनल प्रबंधक को सौंपी है। लोन खातों के गहने बैंक शाखा में तीन तालों में रखे जाते थे। तीनों चाबियां तीनों अधिकारियों के पास होती हैं। आखिर यह तीनों चाबियां चपरासी तक कैसे पहुंची, कब उसने इस घटना को अंजाम दिया, इस घटना में किस-किस अधिकारी, कर्मचारी की संलिप्तता है। यह जांच का विषय है। इस लापरवाही में अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
सूत्रों की माने तो बैंक शाखा के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने बैंक में कार्यरत महिला कर्मी पर चोरी करने का संदेह जताया है। हालांकि इस महिला कर्मी ने पुलिस को लिखित बयान दिया है कि घटना के समय वह अवकाश पर थी। सूत्रों की माने तो चोरी की घटना का पता बैंक शाखा के अधिकारियों को पूर्व में ही लग गया था। उन्होंने 28 अगस्त को सीसीटीवी फुटेज भी देखी थी। फुटेज में चपरासी स्ट्रांग रूम के पास खड़ा दिखाई दे रहा है। उसने यह भी स्वीकार कर लिया था कि गहने चोरी कर काशीपुर के किसी विक्रेता को बेच दिए हैं। बैंक अधिकारी अब तक इस मामले को दबाने और आरोपी से गहने या उसकी कीमत वसूलने की जुगत में लगे थे, ताकि लोन उपभोक्ताओं से मामला रफा-दफा किया जा सके।
11 सितंबर को स्वर्ण लोन खाता धारक जब लोन चुकता कर अपने आभूषण वापस लेने बैंक शाखा पहुंचा तो बैंक शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों में खलबली मच गई। इधर, 11 सितंबर के बाद से जिस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को शक के आधार पर निलंबित किया गया है वह भी गायब है। अंचल कार्यालय के दो अधिकारियों के बाद अब मामले की जांच जोनल प्रबंधक रंजीत सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा कि इस घटना में किस-किस अधिकारी की किस हद तक संलिप्तता है।