रुद्रपुर। एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी ने शाहजहांपुर के एक अधिवक्ता को तलब कर घोटाले के गोपनीय दस्तावेजों के के बारे में गहनता से पूछताछ की। वहीं बाजपुर के पांच काश्तकारों से जानकारियां लेने के साथ ही इसी तहसील के आठ और काश्तकारों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
एसआईटी ने काश्तकारों और तहसील कर्मियों से पूछताछ करने के साथ ही कुछ और बिंदुओं पर भी अपनी जांच शुरू कर दी है। शनिवार को एसआईटी द्वारा शाहजहांपुर, यूपी के एक अधिवक्ता से घोटाले संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेजों के संबंध में पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि अधिवक्ता के पास घोटाले संबंधी कुछ महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज थे। इनके आधार पर उन्होंने शासन को पत्र भेजकर घोटाले की जांच की मांग उठाई थी। इसमें महत्वपूर्ण यह था कि पत्र में अधिवक्ता ने जांच कमेटी के लोगों पर भी अपने पद का दुरुपयोग करने की बात कहते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये थे। हैरानी की बात यह थी कि तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने घोटाले का खुलासा करने के बाद घोटाले संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित कर दिया गया था। ऐसे में उक्त अधिवक्ता के पास कहां से और कैसे इतने गोपनीय दस्तावेज आये, यह हैरान करने वाला है। हालांकि पूछताछ में अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2016 में सूचना के अधिकार से दस्तावेज प्राप्त किए थे। फिलहाल एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि अधिवक्ता को मिले दस्तावेज सूचना के अधिकार से मिले थे या नहीं। एसआईटी ने बाजपुर ताली गांव के पांच काश्तकारों से पूछताछ कर उक्त तहसील के ही नये आठ काश्तकारों को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजा।