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16 मामले, 425 पन्नों की जांच रिपोर्ट, 60 से अधिक सवाल

Wed, 15 Aug 2018 12:16 AM IST
धन सिंह बिष्ट    रुदपुर।
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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी जांच के दायरे में आए आईएएस अधिकारी चंद्रेश यादव और पंकज पांडे से पूछताछ को लेकर चल रही अटकलों को रविवार को एसआईटी ने विराम लगा दिया। दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ 16 मामलों को लेकर एसआईटी ने 425 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसके आधार पर एसआईटी ने 60 से अधिक प्रश्नों को लेकर करीब तीन घंटे तक दोनों आईएएस अधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।      

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एसआईटी की जांच में सितंबर 2017 में किच्छा तहसील के साथ ही कुछ अन्य तहसीलों में ऐसे मामले आए जिनमें कृषकों को सरकारी भूमि पर मुुआवजा दिया गया था। कुछ खसरों में बैक डेट पर की गई 143 में भी मुआवजे का भुगतान हुआ था। मामले की जांच के लिए एसआईटी ने पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार और पुलिस से भूमि का संयुक्त सर्वे कराया। साथ ही जिन लोगों ने सरकारी भूमि को बेचा था उनसे भी पूछताछ की गई।

इसके बाद एनएचएआई से आर्बिट्रेशन के मामलों की सूची तलब की। तमाम साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने पंकज पांडे और चंद्रेश यादव के खिलाफ 425 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी।
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सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने दोनों आईएएस अफसरों से तीन घंटे की पूछताछ में करीब 70 से अधिक सवालों के जवाब लिए। एसआईटी के सवालों में मुख्य सवाल सरकारी भूमि पर दिए गए मुआवजे के बारे में था। साथ ही यह भी पूछा गया कि बतौर आर्बिट्रेटर एक ही दिन में दर्जन भर मामलों में कैसे आदेश पारित किया गया।

इसी से जुड़े कई और सवाल भी एसआईटी ने पूछे। लेकिन, अधिकतर सवालों के जवाब में आईएएस अफसरों का कहना था कि उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के तहत सही कार्रवाई की है। किसी तरह के गलत फैसले उनके द्वारा नहीं दिए गए।  

आईएएस ने किया पूरा सहयोग 
रुद्रपुर। सूत्रों के अनुसार आर्बिट्रेशन के मामलों को लेकर दोनों आईएएस से की गई पूछताछ में अफसरों ने एसआईटी को पूरा सहयोग किया। कुछ सवालों में अफसर असहज भी हुए, लेकिन एसआईटी को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।  

शनिवार को मिले कर्मचारी के बयान बने अहम 
रुद्रपुर। सूत्रों के अनुसार एसआईटी की आर्बिट्रेशन के मामलों की रिपोर्ट शासन को भेजने के बाद बीते शनिवार को तत्कालीन डीएम के कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी से एसआईटी ने पूछताछ की, जिसमें कर्मचारी ने भी एसआईटी को आर्बिट्रेटर की ओर से फैसलों की तय तिथि से पहले उनमें निर्णय सुनाने के बयान दिए। और कर्मचारी के बयान से एसआईटी के हाथ और महत्वपूर्ण सुराग लगे इसके बाद एसआईटी ने रविवार को पूछताछ कर आईएएस के बयान दर्ज कर लिए।  

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